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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जांजगीर-चांपा, 4 फरवरी। जिले के स्वास्थ्य विभाग में लिया गया एक प्रशासनिक फैसला इन दिनों गहन चर्चा और सवालों के घेरे में है। 5 जनवरी 2026 को बीडीएम अस्पताल, चांपा से स्थानांतरित होकर प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) बनीं डॉ. अनीता श्रीवास्तव ने कार्यभार संभालने के महज 15 दिनों के भीतर अपने पति डॉ. मनीष श्रीवास्तव को दो अत्यंत संवेदनशील दायित्व सौंप दिए। जारी आदेश के अनुसार उन्हें प्रभारी जिला मलेरिया अधिकारी के साथ-साथ वेयरहाउस शाखा का भी प्रभारी बनाते हुए जिला कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
मलेरिया नियंत्रण और दवा भंडारण जैसे विभाग सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य, बजट और संसाधनों से जुड़े होते हैं। ऐसे में इन जिम्मेदारियों का एक ही व्यक्ति को, वह भी पारिवारिक संबंध के आधार पर मिलना, विभागीय हलकों में सवालों को जन्म दे रहा है।
उल्लेखनीय है जब डॉ. मनीष श्रीवास्तव बीडीएम अस्पताल, चांपा में पदस्थ थे, तब स्थानीय नागरिकों ने कलेक्टर को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वे ओपीडी में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते थे, जिससे मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता था और कई बार इलाज के लिए भटकना पड़ता था। नागरिकों का कहना था कि इससे शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं की साख प्रभावित हो रही थी। शिकायतकर्ताओं ने उन्हें चांपा से हटाने की मांग भी की थी, ताकि अस्पताल नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार संचालित हो सके। हालांकि, इन शिकायतों पर किसी जांच, निष्कर्ष या कार्रवाई की कोई आधिकारिक जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। विभागीय चर्चाओं में यह बात जोर पकड़ रही है कि भले ही सीएमएचओ पद पर डॉ. अनीता श्रीवास्तव हैं, पर कई अहम निर्णयों और प्रशासनिक गतिविधियों में डॉ. मनीष श्रीवास्तव का प्रभाव माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, डॉ. मनीष श्रीवास्तव को मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम और जिला स्टोर शाखा का नोडल अधिकारी कलेक्टर की स्वीकृति से बनाया गया है। लेकिन पूर्व में दर्ज शिकायतों के मद्देनज़र यह सवाल उठ रहा है कि क्या नियुक्ति से पहले सभी तथ्य समय पर और पूरी तरह कलेक्टर के संज्ञान में लाए गए थे, या कहीं जानकारी छिपाई गई। इस पूरे मामले में फिलहाल किसी भी स्तर पर कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई है, न ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई स्पष्टीकरण सामने आया है।


