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भारत पर टैरिफ़ घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि 'भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद करने पर सहमति जताई.'
ऐसे में आशंका जताई जा रही थी कि वैश्विक स्तर और घरेलू स्तर पर तेल की क़ीमतों में उछाल आ सकता है.
हालांकि कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा है कि वेनेज़ुएला के तेल के वैश्विक बाज़ार में आने से यह दबाव कम होगा.
समाचार एजेंसी एएनआई से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा, “यह समझौता काफी लंबे समय से अटका हुआ था. लेकिन तेल के मोर्चे पर मुझे हैरानी नहीं हुई, क्योंकि वेनेज़ुएला, ईरान और रूस के तेल पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंध के चलते बाकी देश सीमित मात्रा में दूसरे स्रोतों से तेल खरीद रहे थे."
"पहले भारत पश्चिमी देशों की सहमति के साथ रूस से तेल खरीदकर सीमित आपूर्ति के दबाव को कम कर पा रहा था. लेकिन जब राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पर सख्ती करते हुए भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया, तो यह व्यवस्था टिकाऊ नहीं रह गई... रूस से तेल खरीद में पहले ही काफी गिरावट आ चुकी है."
उनका कहना है कि रूसी तेल पर कड़े प्रतिबंध के कारण वेनेज़ुएला के तेल के लिए रास्ता खोलना ज़रूरी हो गया था और जनवरी की शुरुआत में हुई कार्रवाई का मकसद था कि वहां एक ज्यादा सहयोगी प्रशासन आए, जो अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में फिर से तेल भेज सके.
शशि थरूर ने कहा, "अमेरिकी कंपनियां इसका उत्पादन करेंगी और भारत जैसे देश, जो पहले ईरान और रूस से तेल खरीदते थे, अब वेनेज़ुएला से तेल खरीदेंगे."
तेल की क़ीमतों को लेकर उनका कहना है, "भारत के नज़रिए से तर्क यह है कि इससे हमें ज़्यादा क़ीमत नहीं चुकानी पड़ेगी... जब दो देशों पर प्रतिबंध हैं और तीसरे पर से प्रतिबंध हटाए जा रहे हैं, तो वैश्विक बाज़ार में तेल की कुल आपूर्ति बनी रहेगी और क़ीमतें स्थिर रहेंगी.” (bbc.com/hindi)


