ताजा खबर
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 25 जनवरी। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक पुलिस निरीक्षक के खिलाफ जारी वेतन वसूली आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सेवा अवधि के दौरान वेतन का कथित अधिक भुगतान हुआ हो, तो उसकी वसूली किसी भी शासकीय अधिकारी या कर्मचारी से नहीं की जा सकती।
राजनांदगांव के पुरानी पुलिस लाइन निवासी देवप्रकाश डाडर वर्तमान में पुलिस दूरसंचार केंद्र, राजनांदगांव में निरीक्षक के पद पर पदस्थ हैं। उनके खिलाफ दूरसंचार, भिलाई जोन के पुलिस अधीक्षक द्वारा पूर्व सेवा अवधि में वेतनवृद्धि में अनियमितता का हवाला देते हुए वसूली आदेश जारी किया गया था। इस आदेश से आहत होकर उन्होंने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ताओं ने दलील दी कि भारत का सर्वोच्च न्यायालय के कई महत्वपूर्ण फैसलों में यह सिद्धांत स्थापित हो चुका है कि यदि वेतन का अधिक भुगतान पांच वर्ष से अधिक पुराना है, तो उसकी वसूली नहीं की जा सकती। अदालत के समक्ष स्टेट ऑफ पंजाब बनाम रफीक मसीह तथा थॉमस डेनियल बनाम स्टेट ऑफ केरल सहित अन्य निर्णयों का हवाला दिया गया।
हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए वसूली आदेश को निरस्त कर दिया और दूरसंचार, भिलाई जोन के एसपी को निर्देश दिए कि यदि याचिकाकर्ता से कोई राशि वसूल की गई है, तो उसे तत्काल वापस किया जाए। अदालत ने कहा कि यह निर्णय उच्चतम न्यायालय और हाईकोर्ट द्वारा पहले से तय कानूनी सिद्धांतों के अनुरूप है।


