ताजा खबर
शिक्षा सचिव को व्यक्तिगत निगरानी के निर्देश, 11 मार्च को अगली सुनवाई
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 24 जनवरी। राज्य में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत नियम और दिशा-निर्देश तय करने में हो रही देरी पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के प्रति कड़ी नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को इस प्रक्रिया की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने और शीघ्र अमल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी।
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव ने व्यक्तिगत शपथपत्र पेश किया। इसमें बताया गया कि आरटीई अधिनियम, 2009 की धारा 35(2) के तहत विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। सचिव ने कहा कि यह एक विधायी प्रक्रिया है और इसमें विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की आवश्यकता होती है, इसलिए समय लग रहा है। हालांकि, सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया कि दिशा-निर्देश जल्द लागू कर दिए जाएंगे।
इस मामले में सीवी भागवंत राव द्वारा अधिवक्ता देवार्षि ठाकुर के माध्यम से जनहित याचिका दायर की गई है। इसके अलावा भी लगभग एक दर्जन अन्य याचिकाएं हाईकोर्ट में लंबित हैं, जिनमें आरटीई के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की गई है।
शिक्षा सचिव ने अदालत को बताया कि दुर्ग जिले में आरटीई पोर्टल पर प्राप्त 183 शिकायतों का निराकरण किया जा चुका है। रायपुर जिले में 157 शिकायतें सुलझाई गई हैं। बिलासपुर जिले में 100 में से 99 शिकायतों का निपटारा हुआ है, जबकि एक शिकायत तकनीकी कारणों से लंबित है।
हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि पोर्टल के अलावा व्यक्तिगत रूप से दी गई कई शिकायतें अब भी लंबित हैं। इस पर हाईकोर्ट ने सचिव को सभी लंबित शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।
सुनवाई के दौरान एक हस्तक्षेप याचिका में आरोप लगाया गया कि कुछ स्कूलों में दस्तावेजों के सत्यापन के बिना ही मध्य सत्र के प्रवेश रद्द कर दिए गए। साथ ही प्रवेश स्तर के स्कूलों में बच्चों के शोषण से जुड़े मामलों पर भी गंभीर चिंता जताई गई।
हाईकोर्ट ने हस्तक्षेपकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे 10 दिनों के भीतर शिक्षा सचिव के समक्ष उपस्थित होकर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।


