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सीनियर पाथ वे सुपरवाइजर भर्ती मामले में याचिकाकर्ताओं को हाई कोर्ट से राहत
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 24 जनवरी। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में सीनियर पाथ वे सुपरवाइजर पदों की भर्ती से जुड़े विवाद में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। चयन सूची में बदलाव के कारण वर्षों बाद नौकरी से हटाए जा रहे कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि चयन समिति की तकनीकी त्रुटियों का खामियाजा निर्दोष कर्मचारियों पर नहीं डाला जा सकता।
मामले के अनुसार, रेलवे बोर्ड ने वर्ष 2012 में सीनियर पाथ वे सुपरवाइजर के 17 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2013 में सुरेंद्र कुमार कौशिक, कृष्ण कुमार सहित अन्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति की गई। ये कर्मचारी 15 फरवरी 2013 से निरंतर इस पद पर कार्यरत रहे।
बाद में चयन मानदंड और अतिरिक्त अंकों के निर्धारण को लेकर विवाद खड़ा हुआ। इस पर केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में याचिका दायर की गई। अधिकरण के आदेश के बाद 2016 में संशोधित चयन सूची जारी की गई, जिसमें पहले चयनित कुछ कर्मचारियों के नाम बाहर कर दिए गए। इससे प्रभावित कर्मचारियों ने हाईकोर्ट का रुख किया।
मामले की सुनवाई जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की खंडपीठ ने की। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की ओर से न तो कोई धोखाधड़ी हुई और न ही गलत जानकारी दी गई। त्रुटि चयन समिति की थी।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि इतने वर्षों बाद सेवा से हटाना परिवारों की आर्थिक सुरक्षा पर गंभीर आघात होगा और यह घोर अन्याय है।
हाईकोर्ट ने रेलवे को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता कर्मचारियों को संशोधित मेरिट सूची में शामिल किया जाए। साथ ही पुराने और नए अभ्यर्थियों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए यह भी आदेश दिया गया कि इन कर्मचारियों को वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे स्थान दिया जाए।


