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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 21 जनवरी। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद के साहित्यकार मनोज रूपड़ा के साथ हुए अपमानजनक व्यवहार के मामले में कुलपति पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि हिन्दी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. गौरी त्रिपाठी को पद से हटा दिया गया है।
बीते सात जनवरी को गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग और साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में “समकालीन हिन्दी कहानी: बदलते जीवन संदर्भ” विषय पर राष्ट्रीय परिसंवाद आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में देशभर के साहित्यकार और शिक्षाविद शामिल हुए थे।
कार्यक्रम के दौरान कुलपति आलोक कुमार चक्रवाल अध्यक्षीय उद्बोधन दे रहे थे। इसी बीच उन्होंने मंच पर उपस्थित कथाकार मनोज रूपड़ा से यह पूछ लिया कि “आप बोर तो नहीं हो रहे हैं?” इस पर साहित्यकार ने संयमित ढंग से कहा कि आप विषय से हट कर बात कर रहे हैं, विषय पर बात की जानी चाहिए। इतना सुनते ही कुलपति आपा खो बैठे और उन्होंने न केवल मनोज रूपड़ा को कार्यक्रम से बाहर जाने को कहा, बल्कि अन्य साहित्यकारों से भी टिप्पणी कर दी कि जिन्हें जाना है, वे जा सकते हैं।
इस घटनाक्रम के बाद राष्ट्रीय स्तर पर साहित्यिक और शैक्षणिक जगत में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। इसे एक वरिष्ठ साहित्यकार का सार्वजनिक अपमान बताया गया। कई साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने इसे असहिष्णुता और अकादमिक गरिमा के खिलाफ करार दिया। राजनीतिक स्तर पर भी प्रतिक्रिया सामने आई। कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव और मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया ने कुलपति के व्यवहार को अनुचित बताते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
विवाद के बावजूद कुलपति के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया गया, न ही उन्होंने खुद इस मामले में कोई अफसोस जताया। इसके विपरीत, कार्यक्रम के आयोजन से जुड़े हिन्दी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. गौरी त्रिपाठी को उनके पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर रमेश गोहे को नया विभागाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।


