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भूपेन्द्र के हौसले के आगे दिव्यांगता भी हार गई
रजिन्दर खनूजा
पिथौरा, 21 जनवरी (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)। हौसला अगर मजबूत हो तो जिंदगी की सबसे बड़ी मजबूरी भी रास्ता रोक नहीं पाती। दृष्टिबाधित होते हुए भी भूपेंद्र पटेल ने यह साबित कर दिखाया कि दिव्यांगता जीवन की रफ्तार को धीमा कर सकती है मंजिल को नहीं। पढ़ाई, खेल और सामाजिक सहभागिता के चलते भूपेंद्र की संघर्षगाथा आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
जन्म से दृष्टिबाधित भूपेंद्र पटेल वर्तमान में शासकीय चन्द्रपाल डड़सेना महाविद्यालय, पिथौरा में हिंदी साहित्य विषय से एमए अंतिम वर्ष के नियमित विद्यार्थी हैं। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा शासकीय प्राथमिक शाला बोइरालामी से प्राप्त की।
भूपेंद्र पटेल ने ‘छत्तीसगढ़’ को बताया कि वे ग्राम बोइरालामी, विकासखंड पिथौरा के निवासी हैं। उनके पिता चंदाराम पटेल और माता लछवंतिन बाई मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं और आजीविका के लिए अन्य राज्यों में काम करने जाते रहे हैं। दृष्टिबाधित होने के कारण उनकी प्रारंभिक शिक्षा ग्रामीण परिवेश में हुई।
प्राथमिक शिक्षा के बाद भूपेंद्र ने नेत्रहीन फॉर्च्यून विद्यालय, करमापटपर (बागबाहरा) से आठवीं कक्षा उत्तीर्ण की। वर्ष 2014 में पिथौरा में आयोजित दिव्यांग बच्चों से संबंधित एक कार्यक्रम के दौरान उन्हें दिव्यांग मित्र मंडल पिथौरा द्वारा संचालित हौसले की पाठशाला के बारे में जानकारी मिली, जहां प्रति रविवार प्रेरणात्मक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। इसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई जारी रखने का निर्णय लिया।
दिव्यांग मित्र मंडल पिथौरा के सहयोग से उन्होंने कक्षा 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई बेलडीह और बुंदेली विद्यालयों से पूरी की। इसके बाद लुई ब्रेल सेवा समिति पिथौरा के संयोजक बीजू पटनायक के सहयोग से शासकीय चन्द्रपाल डड़सेना महाविद्यालय में बीए में प्रवेश लिया। वर्तमान में वे एमए अंतिम वर्ष में अध्ययनरत हैं।
भूपेंद्र के जवाब को लिखता है श्रवण
दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को परीक्षा के दौरान लेखक (राइटर) की आवश्यकता होती है। इस संबंध में बताया गया कि ग्राम बुंदेली निवासी श्रवण यादव, जिनकी शैक्षणिक योग्यता 12वीं है, बीए प्रथम वर्ष से अब तक भूपेंद्र की परीक्षाओं में लेखक के रूप में सहयोग कर रहे हैं।
पढ़ाई के साथ मैदान में भी दिखाए कौशल
भूपेंद्र पटेल ने कक्षा 10वीं के दौरान राज्य स्तरीय मैराथन प्रतियोगिता में भाग लिया था, जिसमें उन्होंने तृतीय स्थान प्राप्त किया और 15 हजार रुपये की पुरस्कार राशि मिली।
कोरोनाकाल में छात्रवृत्ति की राशि दान की
छत्तीसगढ़ प्रदेश शतरंज संघ के राज्य सचिव हेमंत खुटे ने बताया कि वर्ष 2021 में कोरोना महामारी के दौरान अखिल भारतीय शतरंज महासंघ द्वारा कोविड चेकमेट अभियान चलाया गया था। इस अभियान के अंतर्गत भूपेंद्र पटेल ने अपनी छात्रवृत्ति की राशि कोरोना से प्रभावित खिलाडिय़ों की सहायता के लिए प्रदान की थी।
सहयोग से संवरता भविष्य
दिव्यांग मित्र मंडल पिथौरा के संयोजक और पुस्तक जीवन दर्पण के लेखक बीजू पटनायक ने कहा कि दिव्यांग युवाओं को अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर वे समाज की मुख्यधारा में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।
महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य एस.एस. तिवारी ने कहा कि भूपेंद्र पटेल की नियमित उपस्थिति और अध्ययन के प्रति प्रतिबद्धता अन्य विद्यार्थियों के लिए उदाहरण है।
नेत्रहीन विद्यार्थियों की पढ़ाई की पद्धति
नेत्रहीन विद्यार्थी ब्रेल लिपि के माध्यम से अध्ययन करते हैं, जिसमें उभरे हुए बिंदुओं को स्पर्श के जरिए पढ़ा जाता है। इसके अतिरिक्त ऑडियो सामग्री, स्क्रीन रीडर और ब्रेल डिस्प्ले जैसी तकनीकों का भी उपयोग किया जाता है।




