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छत्तीसगढ़ की 19 नदियों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार बनाएंगी कमेटी
21-Jan-2026 12:32 PM
छत्तीसगढ़ की 19 नदियों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार बनाएंगी कमेटी

हाईकोर्ट ने उद्गम स्थलों की पहचान और पुनर्जीवन पर काम करने का निर्देश दिया

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 21 जनवरी। छत्तीसगढ़ से निकलने वाली नदियों के उद्गम स्थल क्यों सूख रहे हैं, इसकी जांच और संरक्षण के लिए राज्य सरकार अब विशेष कमेटी बनाएगी। जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने यह महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने न केवल उद्गम स्थलों की पहचान और पुनर्जीवन पर काम करने को कहा है, बल्कि सभी नदियों और उनके उद्गम स्थलों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने का भी आदेश दिया है।

मंगलवार को सुनवाई में सामने आया कि राज्य की कई नदियां और उनके उद्गम स्थल राजस्व रिकॉर्ड में अब भी ‘नाले’ के रूप में दर्ज हैं। हाईकोर्ट ने इसे  लापरवाही मानते हुए सुधार के निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में संरक्षण कार्यों में कानूनी और प्रशासनिक बाधा न आए।

अरपा नदी सहित प्रदेश की अन्य नदियों के संरक्षण और संवर्धन की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि अरपा में सालभर पानी बनाए रखने की योजना के साथ-साथ प्रदेश की प्रमुख नदियों के रिवाइवल पर भी काम किया जा रहा है।

हाईकोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार ने कमेटी गठन पर सहमति जताई है। इस कमेटी में तकनीकी विशेषज्ञ अधिकारियों के साथ इतिहासकार, लेखक और पर्यावरणविद भी शामिल किए जाएंगे। कमेटी का पहला और प्राथमिक कार्य नदियों के वास्तविक उद्गम स्थलों की तलाश करना होगा। इसके बाद इन स्थलों को पुनर्जीवित कर जल प्रवाह बनाए रखने के उपाय सुझाए जाएंगे।

जिन जिलों से नदियों का उद्गम होता है, वहां के कलेक्टर संबंधित कमेटी के अध्यक्ष होंगे। इसके साथ ही खनिज विभाग, वन विभाग और जिला पंचायत के अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल किए जाएंगे। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की नीतिगत और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

मालूम हो कि छत्तीसगढ़ में 19 छोटी-बड़ी नदियों का उद्गम है। इनमें धमतरी के सिहावा से महानदी, राजनांदगांव के अंबागढ़ से शिवनाथ, कांकेर के भानुप्रतापपुर से तांदुला, मनेन्द्रगढ़ के रामगढ़ से हसदेव, गुरुर के पेटेचुआ से खारून, महासमुंद से जोंक, बिंद्रानवागढ़ से पैरी, मैनपाट से मांड, जशपुर के पंरापाट से ईब, रायगढ़ के लुडेग से केलो, कोरबा के पठार से बोराई, मलाजकुंडम से दूध, बिलासपुर के खुड़िया पठार से कन्हार, सरगुजा की मातरिंगा पहाड़ी से रिहन्द, दुर्ग की उच्च भूमि से कोटरी, बैलाडीला से शबरी, डांगरी-डोंगरी से डंकिन, बैलाडीला से शंखिनी, राजनांदगांव के पठार से बाघ और कोडागांव से नारंगी नदी निकलती है।

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च तय की है। तब तक राज्य सरकार को कमेटी गठन और प्रारंभिक कार्रवाई की स्थिति से अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं।

 


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