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आवारा कुत्तों के मामले में मेनका गांधी की टिप्पणी से सुप्रीम कोर्ट नाराज़, कहा कोर्ट की 'अवमानना' हुई
20-Jan-2026 5:50 PM
आवारा कुत्तों के मामले में मेनका गांधी की टिप्पणी से सुप्रीम कोर्ट नाराज़, कहा कोर्ट की 'अवमानना' हुई

आवारा कुत्तों के मामले में दिए गए आदेश को लेकर मेनका गांधी की टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराज़गी जताई है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, सुप्रीम कोर्ट ने 20 जनवरी को पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की उन टिप्पणियों पर असंतोष जताया, जिनमें उन्होंने आवारा कुत्तों के मुद्दे पर शीर्ष अदालत के आदेशों की आलोचना की थी.

अदालत ने कहा कि मेनका गांधी ने 'कोर्ट की अवमानना' की है.

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि पूर्व मंत्री ने बिना सोचे-समझे हर किसी के ख़िलाफ़ हर तरह की टिप्पणियां की हैं.

मेनका गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन से सवाल करते हुए पीठ ने कहा, “आप कहते हैं कि अदालत को अपनी टिप्पणी में संयम रखना चाहिए, लेकिन क्या आपने अपनी मुवक्किल से पूछा है कि उन्होंने किस तरह की टिप्पणियां की हैं. क्या आपने उनका पॉडकास्ट सुना है. उन्होंने बिना सोचे-समझे हर किसी के ख़िलाफ़ बयान दिए हैं. क्या आपने उनकी बॉडी लैंग्वेज देखी है.”

पीठ ने कहा कि अदालत अपनी उदारता के चलते पूर्व केंद्रीय मंत्री के ख़िलाफ़ अवमानना की कार्यवाही शुरू नहीं कर रही है.

न्यायमूर्ति मेहता ने रामचंद्रन से पूछा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री के तौर पर मेनका गांधी ने आवारा कुत्तों की समस्या ख़त्म करने के लिए किस तरह की बजटीय मदद दिलाने में भूमिका निभाई?

इस पर रामचंद्रन ने कहा कि वह आतंकवादी अजमल कसाब की तरफ से भी पेश हो चुके हैं और बजट का आवंटन नीति से जुड़ा मामला होता है.

इस पर न्यायमूर्ति नाथ ने टिप्पणी की, “अजमल कसाब ने अदालत की अवमानना नहीं की थी, लेकिन आपकी मुवक्किल ने की है.”

पीठ ने कहा कि कुत्तों को खाना खिलाने वालों को जवाबदेह ठहराने वाली टिप्पणी व्यंग्य में नहीं, बल्कि गंभीरता से की गई थी, हालांकि यह सुनवाई के दौरान बातचीत के संदर्भ में कही गई थी.

मामले की सुनवाई अभी जारी है.

इससे पहले 13 जनवरी को शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह कुत्तों के काटने की घटनाओं पर राज्यों से “भारी मुआवजा” दिलाने के लिए कहेगी और ऐसे मामलों में कुत्तों को खाना खिलाने वालों की जवाबदेही तय करेगी.

अदालत ने यह भी कहा था कि पिछले पांच साल से आवारा जानवरों से जुड़े नियमों को लागू नहीं किया गया है, जो चिंता का विषय है. (bbc.com/hindi)


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