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खारून नदी स्टॉपडैम पर सड़क नहीं, हाईकोर्ट ने सचिव से मांगा गया व्यक्तिगत हलफनामा
20-Jan-2026 1:52 PM
खारून नदी स्टॉपडैम पर सड़क नहीं, हाईकोर्ट ने सचिव से मांगा गया व्यक्तिगत हलफनामा

'छत्तीसगढ़' संवाददाता

बिलासपुर, 20 जनवरी। मोहरा और हरदीडीह गांवों के बीच खारून नदी पर बने स्टॉपडैम के किनारे अब तक संपर्क सड़क नहीं बनने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। अदालत ने इस मामले को जनहित याचिका मानते हुए जल संसाधन विभाग के सचिव, रायपुर को निर्देश दिया है कि वे सड़क निर्माण के लिए अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी व्यक्तिगत शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत करें।

मीडिया के जरिए खुलासा हुआ था कि वर्ष 2015 में सिंचाई विभाग द्वारा निर्मित स्टॉपडैम आज भी अपनी पूरी उपयोगिता साबित नहीं कर पाया है। निर्माण के समय स्थानीय लोगों ने डैम के साथ आसान आवागमन के लिए सड़क की मांग की थी, लेकिन हरदीडीह की ओर निजी भूमि होने के कारण सड़क निर्माण बीच में ही रुक गया। विभाग ने न तो भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की और न ही मुआवजा देकर वैकल्पिक व्यवस्था की।

डैम से सिंचाई सुविधा मिलने और मोहरा से बिलासपुर तक आवागमन आसान होने की उम्मीद थी, लेकिन सड़क न बनने से यह परियोजना ग्रामीणों के लिए महज कागजी उपलब्धि बनकर रह गई। पिछले 12 वर्षों से संपर्क मार्ग अधूरा पड़ा है।

सोमवार को हुई सुनवाई में राज्य की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता ने बताया कि स्टॉपडैम आसपास के गांवों को पानी उपलब्ध करा रहा है, लेकिन संपर्क सड़क के मामले में अभी ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि जल संसाधन विभाग के सचिव इस प्रकरण में आवश्यक पक्षकार हैं।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र अग्रवाल की खंडपीठ ने सचिव, जल संसाधन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन, रायपुर को इस जनहित याचिका में पक्षकार बनाते हुए उन्हें व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी को तय की गई है।


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