ताजा खबर

बस्तरवासियों को जल्द मिलेगी जनजातीय गौरव वाटिका
18-Jan-2026 8:21 PM
बस्तरवासियों को जल्द मिलेगी जनजातीय गौरव वाटिका

मंत्री केदार कश्यप ने किया निरीक्षण

 'छत्तीसगढ़' संवाददाता
जगदलपुर, 18 जनवरी।
जगदलपुरवासियों को शहर की आपाधापी, धूल और प्रदूषण से दूर प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताने के लिए जल्द ही एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने शनिवार को जगदलपुर के निकट कुम्हड़ाकोट में निर्माणाधीन 'जनजातीय गौरव वाटिका' का निरीक्षण किया। लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही यह वाटिका न केवल पर्यटन का केंद्र होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक अनूठी मिसाल पेश करेगी।

निरीक्षण के दौरान वन मंडलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता ने मंत्री कश्यप को अवगत कराया कि करीब 25 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैले इस प्रोजेक्ट को शुरू में एक हेल्थ पार्क के रूप में परिकल्पित किया गया था, लेकिन अब इसे एक भव्य वाटिका का रूप दिया गया है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नागरिकों के लिए यहाँ लगभग 1700 मीटर का एक लंबा वॉकिंग ट्रेल बनाया गया है। इसके साथ ही योगा शेड, योगा ज़ोन और ओपन जिम जैसी आधुनिक सुविधाएं भी यहाँ उपलब्ध होंगी, जिससे लोग ताजी हवा में अपने स्वास्थ्य को बेहतर बना सकेंगे।

पर्यटकों के मनोरंजन और सामाजिक जुड़ाव को ध्यान में रखते हुए वाटिका में कई आकर्षक प्रयोग किए गए हैं। वॉकिंग ट्रेल के बीच-बीच में 'गपशप ज़ोन' बनाए गए हैं, जहाँ प्लेटफॉर्म और कुर्सियाँ लगाई गई हैं ताकि लोग आराम से बैठकर बातचीत कर सकें। पारिवारिक आयोजनों और छोटी पार्टियों के लिए यहाँ पाँच सुंदर पगोड़ा निर्मित किए गए हैं, जिन्हें बर्थडे पार्टी या अन्य कार्यक्रमों के लिए बुक किया जा सकेगा। इसके अलावा बच्चों के लिए एक अलग 'प्ले एरिया' भी तैयार किया जा रहा है। जंगल के नैसर्गिक वातावरण में भोजन का आनंद लेने के लिए एक विशेष डाइनिंग क्षेत्र भी विकसित किया गया है, जिसका संचालन स्थानीय महिला समूहों या समितियों के माध्यम से किया जाएगा।

इस वाटिका की सबसे अहम विशेषता इसकी 'इको-फ्रेंडली' नीति है। यह पूरा क्षेत्र 'प्लास्टिक फ्री ज़ोन' होगा। पर्यटकों को बाहर से किसी भी प्रकार की खाद्य सामग्री या फूड पैकेट अंदर ले जाने की अनुमति नहीं होगी। खान-पान की पूरी व्यवस्था अंदर स्थित कैंटीन में ही रहेगी, जहाँ पूर्णत: बायो-डिग्रेडेबल दोने और पत्तल में ही भोजन परोसा जाएगा। इसके अतिरिक्त, यह वाटिका जैव-विविधता के संरक्षण का केंद्र भी बनेगी। यहाँ कांगेर घाटी और बस्तर के अन्य वन क्षेत्रों से विलुप्त हो रही दुर्लभ स्थानीय प्रजातियों के पौधों और विभिन्न प्रकार के सुंदर 'ऑर्किड' को लाकर संरक्षित किया जा रहा है, जो पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होंगे। इसके साथ ही यहां तालाब और उसमें आइलैंड का निर्माण भी किया गया है।

आगंतुकों की सुविधाओं का भी यहाँ पूरा ख्याल रखा गया है। प्रवेश द्वार पर भव्य पार्किंग, टिकट काउंटर और महिला-पुरुषों के लिए अलग-अलग प्रसाधन की व्यवस्था की गई है। विभाग की भविष्य की योजनाओं में यहाँ ट्री-हाउस बनाने और एडवेंचर स्पोर्ट्स शुरू करने की भी तैयारी है, जिससे आने वाले समय में यह वाटिका बस्तर के पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख स्थल बनकर उभरेगी।


अन्य पोस्ट