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एसईसीएल कर्मचारी को मिली सजा पर हाईकोर्ट की रोक, कहा-नियमों से बाहर दंड अमान्य
17-Jan-2026 1:07 PM
एसईसीएल कर्मचारी को मिली सजा पर हाईकोर्ट की रोक, कहा-नियमों से बाहर दंड अमान्य

'छत्तीसगढ़' संवाददाता

बिलासपुर, 17 जनवरी। एसईसीएल कर्मचारी के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कहा है कि नियम और कानून की सीमा से बाहर जाकर दी गई कोई भी सजा कानून की नजर में मान्य नहीं हो सकती। इस आधार पर कोर्ट ने संबंधित प्रकरण में निलंबन, वेतन और इंक्रीमेंट से जुड़ी कार्रवाई पर पुनर्विचार के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने एसईसीएल प्रबंधन को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता कर्मचारी के निलंबन, वेतन भुगतान और इंक्रीमेंट से जुड़े तथ्यों की विस्तृत जांच कर एक माह के भीतर रिपोर्ट पेश की जाए।

मामला साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के लेखा अधिकारी रजनीश कुमार गौतम का है। वे कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी एसईसीएल में पदस्थ थे।
उन पर आरोप लगाया गया था कि पूर्व सैनिकों की एजेंसियों से संबंधित कोल लोडिंग और परिवहन बिलों में बकाया राशि की कटौती और वसूली नहीं हो पाई, जिससे कंपनी को वित्तीय नुकसान हुआ।

विभागीय जांच के बाद एसईसीएल प्रबंधन ने उन्हें एक वर्ष के लिए निचले वेतनमान पर पदावनत (डिमोशन) कर दिया। इसके साथ ही इस अवधि में इंक्रीमेंट रोकने का आदेश भी जारी किया गया। इस दंडात्मक कार्रवाई के खिलाफ कर्मचारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रफुल्ल एन. भारत ने दलील दी कि विवादित बिलों की लेखापरीक्षा, जांच और वसूली का दायित्व कभी भी याचिकाकर्ता को सौंपा ही नहीं गया था।
उनका कहना था कि कर्मचारी की भूमिका केवल रिकॉर्ड के लिए बिल प्राप्त करने और आगे संबंधित विभाग को भेजने तक सीमित थी। ऐसा कोई दस्तावेज या प्रमाण नहीं है, जिससे यह साबित हो कि जांच या वसूली की जिम्मेदारी उन्हें दी गई थी।

सुनवाई कर रहे जस्टिस ए.के. प्रसाद ने अनुशासनात्मक प्राधिकारी की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि कर्मचारी के बचाव में मौजूद महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्देशों को नजरअंदाज किया गया।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए सिंगल बेंच ने कहा कि वैधानिक नियमों के खिलाफ दी गई सजा कानूनी रूप से टिक नहीं सकती।

 


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