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परिवार में पहले से नौकरी होने पर नहीं मिलेगा अनुकंपा नियुक्ति का लाभ, एसईसीएल को डिवीजन बेंच से राहत
14-Jan-2026 11:48 AM
परिवार में पहले से नौकरी होने पर नहीं मिलेगा अनुकंपा नियुक्ति का लाभ, एसईसीएल को डिवीजन बेंच से राहत

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 14 जनवरी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एसईसीएल में अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक मामले में साफ किया है कि यदि मृत कर्मचारी के परिवार में कोई आश्रित पहले से नौकरी में है, तो अनुकंपा आधार पर नियुक्ति नहीं दी जा सकती। साथ ही ऐसी नियुक्ति के मामले में वही नीति लागू होगी जो कर्मचारी की मृत्यु के समय थी, बाद में संशोधित किए गए नियम का लाभ नहीं मिलेगा।

यह फैसला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की युगल पीठ द्वारा सुनाया गया।

अदालत ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई अधिकार नहीं, बल्कि सामान्य भर्ती नियमों से एक अपवाद है, जिसका उद्देश्य केवल तत्काल आर्थिक संकट से परिवार को उबारना होता है। मामले में मृत कर्मचारी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड ( एसईसीएल) में अधीनस्थ अभियंता के पद पर कार्यरत थे। दिसंबर 2018 में सेवा के दौरान उनका निधन हो गया। इसके बाद उनके पुत्र ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया।

एसईसीएल ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि मृत कर्मचारी की पत्नी पहले से ही एक शासकीय सहायता प्राप्त स्कूल में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं और उन्हें वेतन के साथ पारिवारिक पेंशन भी मिल रही है।

इस फैसले से असंतुष्ट होकर मृत कर्मचारी के पुत्र और पत्नी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उनका तर्क था कि परिवार अब भी गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। उन्होंने जून 2024 में जारी संशोधित परिपत्र का हवाला दिया, जिसमें यह व्यवस्था की गई थी कि यदि परिवार का कोई सदस्य पहले से नौकरी में हो, तब भी दूसरे आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति पर विचार किया जा सकता है।

एसईसीएल ने अदालत के सामने मार्च 1981 के पुराने परिपत्र का हवाला दिया। कंपनी ने कहा कि कर्मचारी की मृत्यु के समय वही नीति लागू थी। इस नीति के तहत, यदि परिवार का कोई आश्रित पहले से नौकरी में है, तो अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती।
एसईसीएल ने यह भी तर्क दिया कि 2024 का संशोधित परिपत्र पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पहले ही याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने युगल पीठ में अपील दायर की। अपील में कहा गया कि मृत कर्मचारी को गैर-कार्यकारी श्रेणी का माना जाना चाहिए और उन पर राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता ( एनसीडब्ल्यूए ) लागू होता है, जिसमें ऐसी कोई रोक नहीं है।

पीठ ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति का दावा उसी नीति के अनुसार तय होगा, जो कर्मचारी की मृत्यु के समय लागू थी। बाद में हुए संशोधन तब तक लागू नहीं हो सकते, जब तक उनमें पिछली तारीख से प्रभाव का स्पष्ट प्रावधान न हो।
अदालत ने यह भी कहा कि मृत कर्मचारी को सेवा लाभों के लिए कार्यकारी श्रेणी में माना गया था, इसलिए 1981 की नीति ही लागू होगी।

अदालत ने कहा कि मृत कर्मचारी की पत्नी पहले से नौकरी में थीं, इसलिए परिवार में आय का स्रोत मौजूद था। ऐसे में अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य पूरा नहीं होता। अंततः कोर्ट ने एकल पीठ के फैसले को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी।


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