ताजा खबर

निर्माण और आयात रोके बिना सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध का दावा केवल दिखावा
12-Jan-2026 12:15 PM
निर्माण और आयात रोके बिना सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध का दावा केवल दिखावा

सूडा के निर्देशों पर सवाल उठाया सिंघवी ने

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 12 जनवरी। राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) द्वारा सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध को लेकर जारी नए निर्देशों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। रायपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता नितिन सिंघवी ने कहा है कि केवल जन-जागरूकता अभियान चलाकर इस गंभीर समस्या का समाधान संभव नहीं है, जब तक प्रतिबंधित प्लास्टिक के निर्माण और दूसरे राज्यों से आयात पर सख्ती से रोक नहीं लगाई जाती।

सूडा ने हाल ही में सभी नगरीय निकायों को निर्देश जारी कर स्वच्छता दीदियों के माध्यम से सिंगल यूज प्लास्टिक के विकल्पों को बढ़ावा देने, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता अभियान चलाने, आर्थिक दंड लगाने, एनजीओ व रहवासी कल्याण संघों के साथ घर-घर संपर्क करने तथा स्कूलों में चित्रकला प्रतियोगिता और नुक्कड़ नाटक आयोजित करने को कहा है।

नितिन सिंघवी ने कहा कि यह कदम ऐसा है जैसे कैंसर का इलाज पैरासिटामोल से किया जा रहा हो। उनका कहना है कि यदि प्रतिबंध केवल आम नागरिकों पर लागू हो और निर्माता व आयातक इसके दायरे से बाहर रहें, तो यह कानून नहीं बल्कि औपचारिकता भर रह जाती है। इससे शासन और जनता के धन की बर्बादी ही होगी।

सिंघवी ने बताया कि वर्ष 2017 में उनकी जनहित याचिका के बाद पहली बार सिंगल यूज प्लास्टिक पर व्यापक प्रतिबंध लगाया गया था, जिसे 2023 में और सख्त किया गया। वर्तमान में 100 प्रतिशत प्लास्टिक और थर्माकोल से बने सिंगल यूज उत्पाद, नॉन-वूवन कैरी बैग सहित कई वस्तुएं प्रतिबंधित हैं, इसके बावजूद इनके निर्माण और आयात पर प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही।

उन्होंने सवाल उठाया कि प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक के सैकड़ों ट्रक प्रतिदिन छत्तीसगढ़ में आखिर कहां से आ रहे हैं। क्या सीमाओं पर इन्हें रोका नहीं जा सकता? प्रदेश में इनका निर्माण कहां हो रहा है और इसे रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं, जबकि बिजली खपत के आंकड़ों से भी इसका आसानी से पता लगाया जा सकता है।

नितिन सिंघवी ने चेतावनी दी कि माइक्रोप्लास्टिक अब मिट्टी, पानी और भोजन श्रृंखला में प्रवेश कर चुका है। वैज्ञानिक अध्ययनों में यह मानव शरीर के फेफड़ों, रक्त, मस्तिष्क, गर्भस्थ शिशु और स्तन दूध तक में पाए जाने की पुष्टि कर चुके हैं। नालियों में जमा प्लास्टिक मच्छरों के प्रजनन को बढ़ावा देता है, जिससे डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सिंगल यूज प्लास्टिक केवल आज की गंदगी नहीं, बल्कि आने वाले समय की बड़ी स्वास्थ्य आपदा का संकेत है।


अन्य पोस्ट