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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर, 9 जनवरी। जगदलपुर से लगभग 38 किलोमीटर दूर लोहड़ीगुड़ा ब्लॉक के ग्राम बाघनपाल में दियारी पर्व का आयोजन किया गया। यह पर्व बस्तर अंचल में धान की कटाई के बाद मनाया जाता है।
दियारी प्रमुख आदिवासी लोक-संस्कृति और कृषि-आधारित त्योहार है। यह एक पारंपरिक और लोक-सांस्कृतिक मेला है। यह मेला स्थानीय आदिवासी संस्कृति, कला और लोक जीवन को करीब से देखने का बड़ा अवसर माना जाता है।
स्थानीय परंपरा के अनुसार, दियारी दीपावली के बाद आयोजित की जाती है और इसमें आसपास के गांवों के लोग भी भाग लेते हैं। इस अवसर पर ग्रामीण परिवारों के साथ मेले में शामिल होते हैं और विभिन्न दुकानों से आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी करते हैं।
मेले में कृषि से जुड़े औजार, कपड़े, जूते-चप्पल, खिलौने और खाद्य सामग्री की दुकानें लगाई गई थीं। झूलों सहित अन्य गतिविधियां भी आयोजित की गईं। लोक नृत्यों की प्रस्तुतियां दी गईं, जिन्हें देखने के लिए लोग एकत्र हुए।
मेले के दौरान परंपरागत रूप से मुर्गा लड़ाई का आयोजन भी किया गया, जिसमें स्थानीय लोग शामिल हुए। इसके अलावा महुआ, सल्फी और लांदा जैसे पारंपरिक पेय पदार्थ भी बिक्री के लिए लाए गए थे।
आयोजन में ग्राम के माझी, चालकी और पटेल की भूमिका रही। ग्रामीणों के अनुसार, दियारी पर्व सामूहिक सहभागिता के साथ मनाया जाता है और इसमें सामाजिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का निर्वहन किया जाता है।






