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बलरामपुर खदान को चालू करने की मांग पर एचएमएस का धरना
09-Jan-2026 7:54 PM
बलरामपुर खदान को चालू करने की मांग पर एचएमएस का धरना

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिश्रामपुर,9 जनवरी। सीटीओ के अभाव में एक अगस्त से बंद पड़ी एसईसीएल बिश्रामपुर की बलरामपुर खदान को पुन: शुरू कराने की मांग को लेकर शुक्रवार नौ जनवरी को कोयला मजदूर सभा (एचएमएस) ने महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर प्रबंधन को ज्ञापन सौंपा। आज के एचएमएस के इस धरना प्रदर्शन में इंटक और सीटू यूनियन का साथ मिला, जबकि बीएमएस और एटक ने इस प्रदर्शन से अपनी दूरी बनाए रखी।

एचएमएस के महामंत्री देवेंद्र मिश्रा  बताया  कि यदि धरना प्रदर्शन के बाद भी प्रबंधन द्वारा उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो संगठन द्वारा 16 जनवरी से क्रमिक भूख हड़ताल तथा 23 जनवरी से आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।

महामंत्री देवेंद्र मिश्रा ने बताया कि बलरामपुर खदान को घाटे में चलने तथा सीटीओ (कंसेंट टू ऑपरेट) के नवीनीकरण नहीं होने का हवाला देकर पिछले करीब छह माह से बंद रखा गया है, जबकि उक्त खदान में लगभग 30 लाख टन कोयले का भंडार मौजूद है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने जानबूझकर खदान को डूबने की स्थिति में छोड़ दिया है।

खदान बंद होने से कुमदा क्षेत्र की दोनों खदानों से जुड़े करीब 500 से अधिक कामगारों पर अन्यत्र तबादले का खतरा मंडरा रहा है। साथ ही खदानों के बंद रहने से स्थानीय बाजार एवं व्यवसाय पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है।

एचएमएस ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही बलरामपुर खदान को पुन: चालू नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।

बताया जाता है कि कुमदा सहक्षेत्र में दो खदान स्थित है उक्त नब्बे की दशक की दोनों भूमिगत खदान वर्तमान में सीटीओ के आभाव में बंद पड़ी है। कुमदा सात आठ खदान पिछले करीब आठ माह से जबकि बलरामपुर दस बारह खदान पिछले छह माह से बंद पड़ी है। दोनों खदान बंद होने से अब वहां लगातार जल भराव की स्थिति निर्मित हो रही। बताया जाता है कि दोनों खदान अधिक घाटे में चलने के कारण कंपनी का उच्च प्रबंधन खदान को पुन: शुरू करने रुचि नहीं ले रहा और अब खबर सामने आ रही है कि दोनों खदानों को एमडीओ मोड में निजी ऑपरेटर को देने प्रस्ताव तैयार कर इसके स्वीकृति का प्रयास किया जा रहा है जिससे श्रम संगठनों में खलबली मची है।

ज्ञात हो कि दोनों खदान में छह सौ से अधिक मैन पावर हैं, जिन पर दूसरे क्षेत्रों के तबादले की तलवार लटकी हुई है।


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