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महिला आयोग ने कोंडागांव की महिला का खत्म कराया सामाजिक बहिष्कार
09-Jan-2026 7:26 PM
महिला आयोग ने कोंडागांव की महिला का खत्म कराया सामाजिक बहिष्कार

आवेदिका को अनावेदक समाज वालों ने वापस किया 60.000 रुपए नगद
'छत्तीसगढ़' संवाददाता

रायपुर, 9 जनवरी ।  छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक, सदस्य लक्ष्मी वर्मा ने आज छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर आज 358 वी. एवं रायपुर जिले में 174 वी. जनसुनवाई की गई।

आज के एक प्रकरण में अनावेदकगणों ने आवेदिका व उसके पति को एक ही जाति का होने के कारण एक दूसरे से दूरी बनाये रखने के लिए दबाव बनाया, गांव से निकाल देने की धमकी दी गई व सामाज से बहिष्कृत कर दिया था। पिछली सुनवाई में अनावेदकगणों के द्वारा आवेदिका से लिये गये सामाजिक दण्ड को वापस करने की समझाईश आयोग द्वारा दिया गया था। आयोग के निर्देश पर आज की सुनवाई मे अनावेदकगणों द्वारा आवेदिका को 60 हजार रू. आयोग के समक्ष वापस दिये। आवेदिका के पति ने आयोग के समक्ष यह स्वीकारा कि वह आवेदिका के साथ अपना वैवाहिक जीवन बनाये रखना चाहता है। आयोग के समक्ष सभी अनावेदकगणों ने सहमति दी की आज के बाद कभी-भी आवेदिका के विवाह को तोड़ने का प्रयास नहीं करेंगे और समाज से बहिष्कृत भी नहीं करेंगे। यदि उनके द्वारा आवेदिका और उसके पति के वैवाहिक जीवन पर रोक लगाया जाता है या सामाज से बहिष्कार किया जाता है तो ऐसी दशा में आवेदिका अनावेदकगणों के खिलाफ थाना में एफआईआर करवा सकेगी।

इस स्तर पर प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।
एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि अनावेदक द्वारा आवेदिका को कार्यस्थल पर प्रताड़ित कर, अवकाश लेने पर व्हाट्सप के माध्यम से कारण बताओं पत्र जारी करने व कार्यालय के समय से अतिरिक्त समय तक कार्यालय में बैठने के लिए कहे जाने की शिकायत आवेदिका ने की थी। अनावेदक द्वारा आवेदिका को व्हाट्सप पर मैसेज करके परेशान किया जाता था। व्हाट्सप मैसेज की रिपोर्ट संलग्न रिपोर्ट देखने पर यह प्रतीत होता है कि अनावेदक द्वारा आवेदिका की निजी जिंदगी व कार्यालयीन समय के पश्चात् व्हाट्सप चैटिंग के माध्यम से परेशान किया जा रहा था। उभय पक्षों ने आयोग के समक्ष जानकारी दी कि मामले की जांच कलेक्टर कोंडागांव द्वारा किया जा रहा है। आयोग ने निर्देशित किया कि जांच प्रतिवेदन की प्रमाणित प्रति लेकर उभय पक्ष आयोग के समक्ष उपस्थित होंगें तत्पश्चात् प्रकरण आगे सुना जायेगा, ताकि प्रकरण का निराकरण किया जा सके।

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि वह शासकीय हाॅस्पिटल भाटापार में नर्स के पद पर कार्यरत् है। अनावेदक अपनी बहन के इलाज हेतु हाॅस्पिटल आया था आवेदिका अपनी ड्यूटी खत्म होने पर ड्यूटी हैंडओवर करके चली गई थी, इसके बावजूद अनावेदक ने आवेदिका से दुव्र्यवहार किया कि उसके सामने ड्यूटी हैंडओवर करना था। अनावेदक शासकीय अस्पताल में स्पष्टीकरण हो जाने के बावजूद उन्हीं मुद्दों पर आवेदिका को बार-बार परेशान कर रहा है। जिस पर अनावेदक ने कहा कि वह आदेश मिलने के बाद से कोई शिकायत नहीं कर रहा है आयोग की समझाईश पर अनावेदक ने भविष्य मे किसी भी प्रकार से आवेदिका को परेशान ना करने व शिकायत ना करने की स्वीकृति आयोग के समक्ष दी। आयोग ने आवेदिका द्वारा प्रस्तुत आवेदन स्वीकार कर अनावेदक के ऐसी हरकत की निंदा की। आवेदिका को समझाईश दिया गया कि यदि भविष्य मे अनावेदक आवेदिका को परेशान करता है तो आवेदिका अनावेदक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा सकती है। इस स्तर पर प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।

एक अन्य प्रकरण में उभय पक्षों को विस्तार से सुना गया, आवेदिका ने बताया कि अनावेदकगणों द्वारा आवेदिका को दहेज के लिए परेशान किया जा रहा था। उभय पक्षों ने आपसी सहमति से सुलहनामा के आधार पर तलाक के एवज में आवेदिका को एकमुश्त भरण-पोषण राशि 15 लाख रू. देने के लिए तैयार हुए।


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