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राजपथ-जनपथ : बिल्ली पालने से रुकेगा भ्रष्टाचार?
09-Jan-2026 5:09 PM
राजपथ-जनपथ : बिल्ली पालने से रुकेगा भ्रष्टाचार?

बिल्ली पालने से रुकेगा भ्रष्टाचार?

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में सुनवाई करते हुए कल यह दलील नहीं मानी कि इनकी वजह से चूहों से बचाव होता है। छत्तीसगढ़ में हजारों की तादात में आवारा कुत्तों के होने के बावजूद चूहे बड़े-बड़े कांड कर रहे हैं, यह जज के नजरिये को सही ठहराता है। कबीरधाम जिले में एक सरकारी धान संग्रहण केंद्र से लगभग 26 हजार क्विंटल करीब 7 करोड़ रुपये का धान गायब है।  अफसरों का दावा है कि यह धान चूहों, दीमकों और अन्य कीड़ों द्वारा नष्ट हो गया। गोदाम में रखा धान या तो पूरी तरह गायब है या क्षतिग्रस्त हो चुका है।

बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद कई बार ऐसी घटनाएं सामने आईं जहां जब्त की गई शराब के गायब होने का दोष चूहों पर डाला गया। सबसे चर्चित मामला 2017 का है, बिहार पुलिस ने दावा किया कि हजारों लीटर शराब चूहों ने पी ली। अकेले पटना से लगभग 9 लाख लीटर शराब गायब हो गई थी। 2018 में 10 लाख लीटर शराब चूहों द्वारा पी ली गई। धनबाद के व्यापारियों ने 800 बोतल शराब गायब होने का दोष चूहों पर मढ़ दिया था। यूपी में भारतीय खाद्य निगम के गोदाम से 3 करोड़ रुपये कीमत का अनाज चूहों द्वारा खा लिया गया। यहीं पर दो तीन साल पहले पुलिस गोदाम से 500 किलो गांजा गायब हो गया था। पुलिस अफसरों ने दावा किया इसे चूहे खा गए।

दरअसल ये घटनाएं दिखाती हैं कि कैसे सरकारी भंडारण में लापरवाही या भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए चूहों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट जज का सुझाव मान लिया जाए तो कुत्तों की जगह बिल्लियों को पालने और उनकी आबादी बढ़ानी चाहिए, जो चूहों से निपटने के लिए अधिक सक्षम जीव है।

 

जम्बूरी के बाद?

प्रदेश के ताकतवर नेता, और सांसद बृजमोहन अग्रवाल के तेवर की राजनीतिक हलकों में खूब चर्चा हो रही है। उन्होंने जिस तरह ‘जंबूरी’ का खुला विरोध किया है, उससे भाजपा संगठन और सरकार में हलचल मची है। दिलचस्प बात ये है कि बृजमोहन के विरोध के बाद भी शुक्रवार को ‘जंबूरी’ का रंगारंग उद्घाटन हो गया।

बालोद के दुधली में राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी हो रहा है। इसमें देश-विदेश से कुल 15 हजार रोवर-रेंजर और सीनियर स्काउट गाइड शिरकत कर रहे हैं। बृजमोहन, स्काउट्स एंड गाइड्स के राज्य इकाई के अध्यक्ष थे। वो शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद भी अध्यक्ष बने रहे, और जब गजेन्द्र यादव स्कूल शिक्षा मंत्री बने तो फिर 13 दिसंबर 2025 को स्काउट्स एंड गाइड्स की राज्य इकाई के अध्यक्ष बन गए।

गजेन्द्र यादव लंबे समय से स्काउट्स एंड गाइड्स से जुड़े रहे हैं। वो 2014 से 2019 तक स्काउट्स एंड गाइड्स के मुख्य आयुक्त रह चुके हैं। इस संस्था की अहमियत वो जानते हैं, और प्रदेश से हजारों युवा संस्था से जुड़े हैं। बताते हैं कि बृजमोहन की नाराजगी इस बात को लेकर रही है कि उनकी जानकारी के बिना ही अध्यक्ष पद से हटा दिया गया, जिसे वो असंवैधानिक बता रहे हैं। वो इसको लेकर हाईकोर्ट भी गए हैं।

उन्होंने इस पूरे कार्यक्रम को स्थगित करने की घोषणा की थी, और आयोजन की तैयारियों में खर्चों को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। बृजमोहन की नाराजगी की परवाह किए बिना पूरी सरकार गजेन्द्र यादव के साथ खड़ी हो गई है, और कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटी है। चर्चा है कि बृजमोहन ने स्काउट्स एंड गाइड्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल जैन से चर्चा कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।

डॉ. अनिल जैन, छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रभारी रह चुके हैं। उन्होंने सीएम, और स्कूल शिक्षा मंत्री से चर्चा भी की। चर्चा का लब्बोलुआब यह रहा कि बृजमोहन की तमाम आपत्तियों को नजर अंदाज कर दिया गया, और सरकार व पार्टी के कुछ प्रमुख नेता आयोजन को सफल बनाने में जुट गए हैं। डॉ. जैन भी रायपुर आ गए हैं, और वो खुद पूरे आयोजन की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। पहली नजर में बृजमोहन आयोजन का विरोध कर अलग-थलग होते दिख रहे हैं। उनकी हाईकोर्ट में याचिका पर सुनवाई की तिथि तय नहीं हुई है। कुल मिलाकर ‘जंबूरी’ निपटने के बाद ही सुनवाई के आसार हैं। ऐसे में बृजमोहन के विरोध के बाद भी ‘जंबूरी’ को झटके के रूप में देखा जा रहा है। कुछ लोगों का अंदाजा है कि पार्टी हाईकमान देर सबेर इस पूरे मामले को संज्ञान में ले सकती है। देखना है आगे क्या होता है।

निंदा का एक तरीका यह भी...

गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल ने राष्ट्रीय स्तर के परिसंवाद कार्यक्रम में जाने-माने कथाकार मनोज रुपड़ा को जिस तरह अपमानित कर सभा से बाहर कर दिया, उसे बिलासपुर के अनेक नागरिक शहर की प्रतिष्ठा से जोड़ रहे हैं। उन्हें लगता है कि अतिथियों के सम्मान की बिलासपुर की परंपरा को कुलपति के बर्ताव से गहरा आघात पहुंचा है। अपने-अपने तरीके से लोग इसका विरोध कर रहे हैं। यह एक पोस्टकार्ड और उस पर लिखा गया संदेश है। साहित्यकार से दुर्व्यहार करने वाले कुलपति को ही भेजा गया है, शायद उनको कुछ शर्मिंदगी महसूस हो, अपनी करतूत के लिए माफी मांगें। ([email protected])


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