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'छत्तीसगढ़' संवाददाता
रायपुर, 6 जनवरी । 2880 करोड़ के शराब घोटाले मामले में एक वर्ष से रायपुर जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा से मिलने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जेल पहुंचे। ईडी की अंतिम चार्जशीट पर 13 जनवरी ट्रायल शुरू होने से पहले और चैतन्य बघेल की रिहाई के बाद बघेल की इस मुलाकात को अहम माना जा रहा है।
मुलाकात के बाद जेल से बाहर निकल भूपेश बघेल ने मीडिया से कहा कि भाजपा के मंत्री और नेता अब अनजाने में ही सच स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक निर्दोष व्यक्ति को ईडी और ईओडब्ल्यू ने पिछले एक साल से जेल में बंद कर रखा है और भाजपा के नेता भी इस बात को मान रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर लखमा निर्दोष हैं तो फिर एफआईआर और कार्रवाई क्यों की गई।
बघेल ने कहा कि कुछ लोग यह कह रहे हैं कि उन्होंने अपने बेटे को जेल से छुड़ा लिया। अगर ऐसा होता तो उनका बेटा जेल क्यों जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी ने अब तक कवासी लखमा की ओर से दायर जवाबी फाइल पर कोई रिप्लाई तक पेश नहीं किया है। उन्होंने भाजपा नेताओं से “घड़ियाली आंसू” बहाने बंद करने की बात कही।
इससे पहले लखमा से बघेल की पर साव ने कहा, यह उनका अपना निर्णय है। बेटे को जमानत मिल चुकी है, लेकिन निर्दोष आदिवासी के साथ जिस तरह से अन्याय हुआ है, उसे प्रदेश की जनता ने देखा है।
गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की हाल ही में रिहाई के बाद भाजपा ने सवाल उठाया था कि शराब घोटाले जैसे गंभीर मामले में भूपेश बघेल के बेटे को जमानत मिल जाती है, जबकि उसी केस में पूर्व मंत्री कवासी लखमा अब भी जेल में हैं।
भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस सरकार के दौरान राजनीतिक साजिश के तहत चुनिंदा नेताओं को फंसाया गया और आदिवासी नेता कवासी लखमा को जानबूझकर निशाना बनाया गया। पार्टी का कहना है कि अगर जांच निष्पक्ष है तो फिर एक को राहत और दूसरे को जेल में क्यों रखा गया है।


