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बिहार के 'लैंड फॉर जॉब' केस में आरजेडी के प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के कई सदस्यों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. सौ से अधिक लोगों के खिलाफ सीबीआई कोर्ट ने फ्रेम किए केस. मामला 2004-2009 के बीच का है.
नई दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई कोर्ट ने पूर्व रेल मंत्री व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री (सीएम) लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी व पूर्व सीएम राबड़ी देवी, उनके बेटे व पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव, पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव, उनकी बेटी मीसा भारती और हेमा यादव सहित 40 से अधिक लोगों के खिलाफ आरोप तय कर दिया है. स्पेशल जज विशाल गोगने की अदालत ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया. ये आरोप भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत तय किए गए हैं. कोर्ट ने यह भी कहा है कि आरोप तय होना दोष सिद्ध होना नहीं है. बचाव पक्ष को पूरा मौका मिलेगा कि वह ट्रायल के दौरान सीबीआई के साक्ष्यों को चुनौती दे.
इस मामले में सीबीआई ने कुल 103 आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम किया था. इनमें से पांच की मौत हो चुकी है. इनमें से 52 को आरोप मुक्त कर दिया गया है, किंतु लालू परिवार का कोई भी सदस्य इससे बच नहीं पाया. शुक्रवार को लालू-राबड़ी को छोड़ अन्य सभी आरोपी कोर्ट में सशरीर हाजिर हुए. इस मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी. सीबीआई इस प्रकरण में आपराधिक मामले की जांच कर रही है, जबकि मनी लांड्रिंग का मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) में अलग से चल रहा है.
क्या है जमीन के बदले नौकरी मामला
यह मामला केंद्र में यूपीए सरकार में लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहने के दौरान का है. आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच उनके रेल मंत्री रहते हुए बिना विज्ञापन निकाले रेलवे में ग्रुप-डी के पदों पर भर्ती की गई. इस नियुक्ति के लिए बहुत कम दाम में कई लोगों से लालू परिवार के सदस्यों तथा करीबियों के नाम पर जमीन (लैंड) लिखवाई गई थीं. गिफ्ट डीड व अन्य तरीके से जमीन ट्रांसफर की गई थी.
लालू परिवार ने बिहार में एक लाख स्क्वायर फीट से अधिक जमीन महज 26 लाख रुपये में हासिल की. जिसकी कीमत उस समय चार करोड़ रुपये से अधिक थी. आरोप है कि उनके दबाव में कई ऐसे लोगों को नौकरी दी गई, जो अपना नाम तक नहीं लिख सकते थे. बिहार के लोगों को ये नौकरियां रेलवे के हाजीपुर, जयपुर, जबलपुर, मुंबई व कोलकाता जोन में दी गई.
2022 में दायर हुई थी एफआईआर
गौरतलब है कि 18 मई, 2022 को इस मामले में सीबीआई ने एफआईआर (प्राथमिकी) दर्ज की थी. इसी साल 10 अक्टूबर को लालू-राबड़ी व मीसा समेत 16 के खिलाफ चार्जशीट (आरोपपत्र) दाखिल की गई थी. 2022 में ही सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी व दो बेटियों मीसा भारती और हेमा यादव समेत आरजेडी प्रमुख के करीबियों व परिजनों के 17 ठिकानों पर छापेमारी की. इसी साल लालू के करीबी भोला यादव को गिरफ्तार किया गया.
जुलाई, 2023 में सीबीआई ने तेजस्वी यादव को सह आरोपी बनाते हुए दूसरी चार्जशीट दायर की. जून, 2024 को सीबीआई ने अंतिम चार्जशीट दाखिल की. मई, 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई द्वारा दायर एफआईआर और चार्जशीट रद्द करने संबंधी याचिका रद कर दी. इसके बाद फिर सुनवाई हुई और फिर कई फैसला स्थगित किया गया और अंतत: नौ जनवरी को कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया.
कोर्ट ने कहा- नौकरियों की सौदेबाजी की गई
हिन्दुस्तान की रिपोर्ट (बार एंड बेंच) के अनुसार कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ‘‘चार्जशीट से पता चलता है कि लालू यादव और उनके परिवार के सदस्य एक क्रिमिनल एंटरप्राइज चला रहे थे. वे बड़ी साजिश का हिस्सा थे. उन्होंने संपत्ति हासिल करने के लिए नौकरियों की सौदेबाजी की. लालू के करीबी लोगों ने जमीन के बदले नौकरियां दिलाने में मदद की. लालू और उनके परिवार के सदस्यों की बरी होने की अपील पूरी तरह अनुचित है. ऐसा लगता है कि लालू यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी निजी जागीर के तौर पर इस्तेमाल किया था.''
प्रथमदृष्टया सीबीआई द्वारा पेश तथ्यों व दस्तावेजों से ये संकेत मिलते हैं कि मामले जांच योग्य गंभीर आरोप हैं, जिन्हें ट्रायल में विस्तार से परखा जाना चाहिए. अदालत के अनुसार, आरोपियों की भूमिकाएं आपस में जुड़ी हुई थीं और सभी ने अपराध को अंजाम देने में साझा उद्देश्य के तहत कार्य किया. वहीं, सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि चयनित अभ्यर्थियों द्वारा या तो लालू प्रसाद यादव, उनके परिजन या उनके करीबियों के नाम पर जमीन उपहार में दी गई या फिर कम दाम पर बेची गई थी. चार्जशीट में यह दावा भी किया गया है कि लालू परिवार के नाम पर जमीन लिखने वाले सभी आरोपियों ने दावा किया है कि उन्हें लालू परिवार से नकद में भुगतान किया गया था.
सीबीआई कोर्ट के आरोप तय करने के फैसले के बाद बिहार की राजनीति का पारा काफी चढ़ गया है. जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, ‘‘लालू परिवार क्रिमिनल पॉलिटिकल सिंडिकेट चला रहा था. यह अति शर्मनाक है. लालू प्रसाद यादव आरजेडी प्रमुख के पद से तत्काल इस्तीफा दे दें. राबड़ी देवी को भी विधान परिषद से इस्तीफा दे देना चाहिए.'' उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव के उपनाम तरुण से भी संपत्ति ली गई. तेजस्वी यादव को भी इस्तीफा देकर मानक स्थापित करना चाहिए.
वहीं, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी कोर्ट के फैसले पर कहते हैं, ‘‘लालू यादव के गुनाहों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है. जिन्होंने भ्रष्टाचार किया है, उस पर कानून अपना काम कर रहा है. 15 साल के जंगलराज में बिहार में और भी घोटाले हुए, जिसके कारण हजारों करोड़ रुपये लालू परिवार के पास गए, जिससे राज्य का विकास बाधित हुआ.'' उन्होंने कहा कि इन घोटालों से बिहार की बहुत बदनामी हुई और बिहार की जनता जंगलराज स्थापित करने वाली भ्रष्टाचारी पार्टी को अब कभी बर्दाश्त नहीं करेगी.
कई दशकों से बिहार की राजनीति लालू प्रसाद यादव के इर्द-गिर्द घूमती रही है. किसी भी परिस्थिति में बिहार की राजनीति में उन्हें नकारना मुश्किल रहा. कोर्ट के फैसले के बाद एक बार फिर राज्य की सभी पार्टियां एक तरफ और लालू यादव अकेले दूसरी तरफ दिखाई दे रहे हैं.


