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-इमरान क़ुरैशी
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन को लिखा है कि कर्नाटक कासरगोड ज़िले के कन्नड़ मीडियम स्कूलों में मलयालम को पहली भाषा के तौर पर 'थोपने' का विरोध करेगा.
केरल का कासरगोड ज़िला कर्नाटक से सटा हुआ है.
सीएम सिद्धारमैया ने कहा, "कर्नाटक भाषाई अल्पसंख्यकों और हमारे गणतंत्र की बहुलवादी भावना की रक्षा में, हमारे पास उपलब्ध हर संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करेगा."
सिद्धारमैया ने अपने पत्र में कहा, "यह रुख़ टकराव से नहीं, बल्कि संविधान और उन लोगों के प्रति हमारे कर्तव्य से आता है जिनकी आवाज़ को कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए."
उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि समझदारी, बातचीत और संवैधानिक मूल्य हमें एक ऐसे समाधान की ओर ले जाएंगे जो हर भाषा को आज़ादी से फलने-फूलने का मौका दे."
केरल मलयालम भाषा विधेयक, 2025, अक्तूबर में विधानसभा में पारित किया गया था. इस विधेयक को विषय समिति के पास भेजा गया था, जिसने तीन दिन बाद इसे मंज़ूरी दे दी थी.
यह विधेयक केरल के सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में 10वीं कक्षा तक मलयालम को अनिवार्य पहली भाषा बनाता है.
इस विधेयक को अभी केरल के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर की मंज़ूरी मिलना बाकी है.
5 अक्तूबर को केरल विधानसभा में विधेयक पेश करते हुए कानून मंत्री पी राजीव ने कहा था कि यह विधेयक भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना चाहता है, जिसमें वे नागरिक भी शामिल हैं जो तमिल, कन्नड़, तुलु और कोंकणी को अपनी मातृभाषा मानते हैं.
हालांकि, सिद्धारमैया ने विजयन को लिखा, "भाषाई अल्पसंख्यक समुदायों के लिए, भाषा सिर्फ़ एक अकादमिक पसंद नहीं है; यह पहचान, गरिमा और अवसरों तक पहुंच है."
"कोई भी नीति जो एक ही भाषाई रास्ते पर चलने के लिए मजबूर करती है, बच्चों पर अनुचित बोझ डाल सकती है, अल्पसंख्यक-संचालित शैक्षणिक संस्थानों को कमज़ोर कर सकती है और लंबे समय से चले आ रहे शैक्षणिक तंत्र को अस्थिर कर सकती है जिसने इन समुदायों को विश्वास के साथ निरंतर सेवा दी है."(bbc.com/hindi)


