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9 साल की बच्ची से रेप, आजीवन कैद की हाईकोर्ट में पुष्टि, अपील खारिज
06-Jan-2026 2:52 PM
9 साल की बच्ची से रेप, आजीवन कैद की हाईकोर्ट में पुष्टि, अपील खारिज

'छत्तीसगढ़' संवाददाता

बिलासपुर, 6 जनवरी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 9 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के एक जघन्य मामले में सत्र न्यायालय द्वारा सुनाई गई मृत्यु पर्यंत आजीवन कारावास की सजा को सही ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि यदि पीड़ित बच्चे की गवाही स्वाभाविक, निरंतर और भरोसेमंद हो, तो वही सजा के लिए पर्याप्त होती है—अलग से किसी पुष्टि की अनिवार्यता नहीं होती।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच में हुई। बेंच ने टिप्पणी की कि नाबालिग को बहला-फुसलाकर या उसकी वैध कस्टडी से ले जाना, यदि उद्देश्य यौन अपराध हो, तो आईपीसी की धारा 363 और 366 लागू होती हैं। आरोपी का कृत्य कानूनन बलात्कार और पेनिट्रेटिव यौन हमले की श्रेणी में आता है।

सीपत थाना क्षेत्र की 9 वर्षीय पीड़िता अपनी 7 वर्षीय चचेरी बहन के साथ गांव में गाय ढूंढ़ने गई थी। इसी दौरान आरोपी प्रीतम गिरी ने दोनों बच्चियों का अपहरण किया और 9 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। किसी तरह आरोपी के चंगुल से छूटकर दोनों बच्चियां रोते हुए घर पहुंचीं। पीड़िता खून से लथपथ थी और बोलने की स्थिति में नहीं थी। उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। 7 वर्षीय बच्ची ने रोते हुए अपने चाचा को पूरी घटना बताई।

पीड़िता के पिता की लिखित शिकायत पर सीपत पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच पूरी की और आरोपी को गिरफ्तार कर चालान पेश किया।

सुनवाई के बाद एडीजे सेकेंड एफटीसी ने 12 अगस्त 2022 को आरोपी को दोषी ठहराते हुए विभिन्न धाराओं में सजा सुनाई, जिसमें धारा 5(एम)/6 के तहत मृत्यु पर्यंत आजीवन कारावास और जुर्माना शामिल है। इसके अलावा अपहरण और बहलाने से संबंधित धाराओं में भी कठोर कारावास की सजाएं दी गईं।

आरोपी ने सत्र न्यायालय के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। डिवीजन बेंच ने अपील खारिज करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट का दोषसिद्धि का निर्णय पूरी तरह सही है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पीड़िता की अकेली, विश्वसनीय गवाही पर भी दोषसिद्धि हो सकती है। केवल अनुमानों और अटकलों के आधार पर संदेह करना उचित नहीं, और हर मामले में पुष्टि की मांग करना पीड़ित के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है।

 

 


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