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-प्रभाकर मणि तिवारी
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (एसआईआर) के ख़िलाफ़ मंगलवार को उत्तर 24-परगना ज़िले के मतुआ बहुल इलाके़ में एक रैली की.
यह एसआईआर के ख़िलाफ़ सीएम ममता की दूसरी रैली थी. रैली के बाद उन्होंने बनगांव में एक जनसभा को संबोधित किया.
अपने भाषण में उन्होंने केंद्र सरकार और बीजेपी के साथ-साथ चुनाव आयोग पर भी हमला बोला.
उन्होंने कहा, "बिहार में महागठबंधन एसआईआर के खेल को नहीं समझ सका. लेकिन यह बंगाल है, बिहार नहीं. हम पर हमला हुआ तो देश हिला देंगे. चुनाव के बाद मैं पूरे देश का दौरा करूंगी."
उन्होंने आरोप लगाया, "बीजेपी बंगाल पर कब्ज़ा करने के लिए एक गैंगस्टर की तरह काम कर रही है."
मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि आख़िर इतने कम समय में बिना किसी ठोस योजना के एसआईआर की क्या ज़रूरत थी? मुख्यमंत्री ने इस कवायद के दौरान बूथ लेवल एजेंटों (बीएलओ) को होने वाली परेशानियों का भी ज़िक्र किया.
उन्होंने आशंका जताई कि ड्राफ़्ट मतदाता सूची आने के बाद भयावह स्थिति पैदा हो सकती है. लेकिन साथ ही उन्होंने लोगों को भरोसा दिया कि राज्य सरकार मतुआ लोगों को ज़रूरी दस्तावेज़ हासिल करने में मदद करेगी.
उन्होंने कहा कि वह बीजेपी के गुजरात चुनाव हारने की भविष्यवाणी कर रही हैं, बंगाल जीतने के प्रयास में गुजरात बीजेपी हाथ से निकल जाएगा.
सीएम ममता ने कहा कि बीजेपी मतुआ समुदाय को डराने की कोशिश कर रही है. साथ ही उन्होंने कहा कि उनके बंगाल में रहते किसी भी मतुआ को राज्य से बाहर नहीं निकाला जा सकता.
मतुआ समुदाय बांग्लादेश से आकर पश्चिम बंगाल में बसा है. माना जाता है कि यहां की कम से कम एक दर्जन सीटों पर यह समुदाय निर्णायक स्थिति में है.(bbc.com/hindi)


