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रायपुर। सीएम भूपेश बघेल ने हसदेव कोल ब्लॉक आवंटन को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सिर्फ राजनीति कर रहे ।उन्होंने कहा कि कोयला चाहिए तो खदान चलानी पड़ेगी। इस साल यहां 8 हजार पेड़ काटे जाएंगे, लेकिन कुछ लोग 8 लाख पेड़ कटने का हल्ला कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जितने पेड़ कटेंगे उतने यहां लगेंगे भी। वहीं जितनी जरूरत होगी उतना ही कोयला दिया जाएगा। श्री बघेल ने कहा कि जो लोग विरोध कर रहे हैं वे पहले अपने घर की बिजली बंद कर दें। एसी, कूलर, पंखा, फ्रीज सब बंद करें और फिर मैदान में आकर लड़ें।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि बढ़ते विरोध के कारण भूपेश बघेल मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। बौखलाहट में आपा खोकर पेड़ कटाई का विरोध करने वालों से कह रहे हैं कि पहले अपने घर की बिजली बंद कर दें, फिर मैदान में आकर लड़ें, उनका यह बयान हास्यास्पद है। जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए खुद भूपेश बघेल इस मामले में राजनीति कर रहे थे और उनके नेताजी वादा कर रहे थे कि पेड़ नहीं कटने देंगे, तब क्या भूपेश बघेल, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी ने अपने अपने घर की बत्ती बंद कर रखी थी? क्या ए.सी., कूलर, पंखे और फ्रिज बंद कर रखे थे जो अब जनता को उपदेश दे रहे हैं।
साय ने कहा कि जब भूपेश बघेल राजनीति करें तो ठीक और जब जनता पेड़ों की अंधाधुंध कटाई का विरोध करे तो गलत! भूपेश बघेल और उनके नेता का यह दोहरा चरित्र ही इनकी असल पहचान है। कांग्रेस की राजमाता के कहने पर तपाक से कैसे जारी हो गई? भूपेश बघेल हर साल 8 हजार पेड़ों की कटाई और उतने ही पेड़ लगाने की जो बात कर रहे हैं, उस पर कोई तब भरोसा कैसे कर सकता है जब कांग्रेस के राज में राजधानी के बाग बगीचों में बापू की कुटिया भी उजाड़ पड़ी हुई हैं। यह सवाल सबसे अहम है कि जो लोग पहले हसदेव अरण्य के पेड़ कटने को लेकर हाय तौबा मचा रहे थे, वे आज इसके समर्थन में जनता को अपमानित क्यों कर रहे हैं। भूपेश बघेल बतायें कि आखिर क्या डील हुई है और राहुल गांधी जवाब दें कि वे जंगल कटने से बचाने पेड़ों से चिपकने के लिए हसदेव कब आ रहे हैं?


