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डीएमएफ की बैठक स्थगित करने खनिज सचिव को लिखा
रायपुर/कोरबा, 7 मई। सीएम और मंत्रियों के मैदानी इलाकों में चल रहे दौरे के बीच राजस्व मंत्री और कोरबा के विधायक जयसिंह अग्रवाल ने कलेक्टर रानू साहू के खिलाफ डीएमएफ में करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार कर शासन को क्षति पहुंचाने, सरकार व कोरबा जिले की छवि को धूमिल करने का आरोप लगाया है। इस मामले में कार्रवाई करने की मांग करते हुए खनिज न्यास संस्थान के नोडल अधिकारी, खनिज सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी को उन्होंने पत्र लिखा है।
अग्रवाल ने पांच पेज लंबे पत्र में कहा है कि जिला खनिज न्यास की अध्यक्ष, कलेक्टर रानू साहू इस फंड की राशि का निजी संस्था के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं और जनप्रतिनिधियों एवं संस्थान के सदस्यों की ओर से प्रस्तावित कार्यों की उपेक्षा कर रही हैं। पहले भी इस बारे में जानकारी दी गई थी, जिस पर आप ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके चलते रानू साहू न्यास की राशि के दुरुपयोग, लूट और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे शासन की छवि धूमिल हो रही है। इसलिए उन्हें फिर से पत्र लिखना पड़ रहा है।
पत्र में लिखा गया है कि छत्तीसगढ़ सरकार के मुखिया ने शिक्षा स्वास्थ्य एवं सड़क के कार्यों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। वहीं इसके विपरीत कोरबा कलेक्टर यदि इससे संबंधित किसी कार्य को स्वीकृति देती हैं तो साफ तौर पर झलकता है कि बिना मांग के कमीशन खोरी के लिए ऐसा किया जा रहा है। मीडिया में आई खबरों का जिक्र करते हुए मंत्री ने पत्र में लिखा है कि 72 लाख रुपए की खेल सामग्री स्कूलों के लिए खरीदी गई, जबकि 2 साल से कोई टूर्नामेंट नहीं हुए हैं न ही पहले की खेल सामग्री टूटी या गायब हुई। शिक्षा विभाग को ही इस खरीदी के बारे में जानकारी नहीं है। इससे स्पष्ट है कि रानू साहू के आचरण एवं कार्य व्यवहार से स्थानीय स्तर पर सरकार की छवि धूमिल हो रही है। संचार माध्यम की व्यापकता और कोरबा के राष्ट्रीय स्तर का शहर होने के कारण छत्तीसगढ़ सरकार की छवि पर काला धब्बा लग रहा है और कलेक्टर रानू साहू मालामाल हो रही हैं।
पत्र में कहा गया है कि 9 मई को जिला खनिज न्यास समिति की बैठक की सूचना मुझे 5 तारीख को दी गई, जबकि पत्र में 2 तारीख लिखा गया था, जो गलत है। पूर्व शासी परिषद से स्वीकृत अधोसंरचना और जनहित के कार्यों के लिए मैंने जो पत्र लिखे थे उनको आज दिनांक तक लंबित रखा गया है जिसका एकमात्र उद्देश्य कलेक्टर का यह है कि उनमें मनचाहे कमीशन की संभावना नहीं है। धरातल पर स्वीकृत कार्य शून्य हैं, ऐसी स्थिति में शासी परिषद की बैठक न्याय संगत नहीं होगा। न्यास के पूर्व अध्यक्ष डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम को पत्राचार के माध्यम से 18 अगस्त 2021 को इस बारे में विस्तार से अवगत कराया गया था तथा पत्र की प्रतिलिपि कलेक्टर कोरबा को भेजी गई थी। तब मंत्री ने कलेक्टर कोरबा को पत्र भेजकर 20 अगस्त को समीक्षा बैठक रखने तथा वांछित जानकारी देने का निर्देश दिया था। आज तक यह जानकारी नहीं दी गई जो घोर लापरवाही है। कलेक्टर से मैंने 11 बिंदुओं पर डीएमएस से संबंधित पूर्व की समीक्षा बैठक संबंधी जानकारी मांगी है, जो अप्राप्त है। पूर्व स्वीकृत कार्य एवं बचत राशि की जानकारी नहीं है। ऐसी स्थिति में आगामी योजनाओं का प्रस्ताव रखना संभव नहीं है।
पत्र में मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा है कि कोरबा का विकास कलेक्टर के मनचाहे मनमानीपूर्ण आचरण के कारण अवरुद्ध हो रहा है। विशेषकर मेरे निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित कार्य को लंबित रखा जा रहा है, जो जिला मुख्यालय भी है। स्वीकृत कार्यों को अनावश्यक लंबित किए जाने से कार्य की लागत भी बढ़ेगी।
पूर्व पदस्थ कलेक्टर ने बताया था कि डीएमएफ में विकास कार्य के लिए मूल राशि के साथ-साथ ब्याज की राशि उपलब्ध है तथा ब्याज की राशि भी शेष है। दूसरी तरफ वर्तमान कलेक्टर पूर्व में स्वीकृत कार्यों के बारे में राशि उपलब्ध नहीं होने की बात कह रही हैं। उन कार्यों को या तो निरस्त कर दिया गया अथवा रोका गया है। दोनों के कथनों में अत्यधिक विरोधाभास है।
मुख्यमंत्री का निर्देश स्वास्थ्य एवं शिक्षा से संबंधित विकास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का है। ऐसे में किसी शासकीय बैठक की सूचना के साथ संपूर्ण कार्यवृत्त की जानकारी भेजी जाती है, लेकिन पूर्व की बैठकों में स्वीकृत कार्य एवं आगामी 9 मई की बैठक के एजेंडे की जानकारी उन्हें नहीं दी गई है, जो इनके भ्रष्ट आचरण को दर्शाता है। यदि इनकी कार्यशैली सही एवं पारदर्शी है तो स्वीकृत लंबित कार्यों के संबंध में जानकारी परिषद के सदस्यों को दी जानी चाहिए, साथ ही खनिज न्यास संस्थान की वेबसाइट पर प्रदर्शित करनी चाहिए।
पत्र में मंत्री ने कहा कि डीएमएफ की वित्तीय स्थिति की जानकारी मांगने पर उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। पूर्व स्वीकृत अनेक निर्माण कार्यों के लिए निविदाएं हो चुकी है जिनकी स्वीकृति न्यास ने पहले दे दी है। इनकी प्रशासकीय स्वीकृति स्वयं के निर्णय से कलेक्टर ने रोक दिया है जो अनेक संदेहों को जन्म देता है। चाही गई जानकारी मांगने पर उपलब्ध नहीं कराया जाना इनकी मंशा को स्पष्ट करता है कि वह पारदर्शिता नहीं रखना चाहती हैं।
पत्र में खनिज न्यास के नोडल अधिकारी से मंत्री ने कहा है कि स्वीकृत कार्यों का प्रशासकीय स्वीकृति आदेश जारी करने के बाद पूर्व में किए गए सभी स्वीकृत कार्यों एवं संपूर्ण कार्यों की जानकारी उपलब्ध कराने के बाद बैठक आयोजित की जाए, जिससे बैठक में समिति के सदस्य आगामी प्रस्ताव रख सकें। साथ ही सदस्यों को न्यास से संबंधित जानकारी मिल सके। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो समझा जाएगा कि कोरबा कलेक्टर के भ्रष्टाचार के कार्यों के माध्यम से शासन को करोड़ों रुपए की क्षति पहुंचाने में आपकी मौन सहमति है। मंत्री ने लिखा है कि विषय की गंभीरता को देखते हुए अपेक्षा है कि तत्काल प्रभाव से हस्तक्षेप करते हुए 9 मई की बैठक को स्थगित कर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करें।







