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-शिव भिलेपारिया
गरियाबंद, 4 मई (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)। जिले में इस वर्ष अच्छी गर्मी पड़ी है। धूप भी इसी वजह से इस वर्ष अधिक पड़ रही है और तापमान लगातार बढ़ रहा है। यह धूप भले ही लोगों को चुभ रही हो। लेकिन यही धूप खरीफ की फसल के लिए मान रहे हंै। किसान एवं कृषि वैज्ञानिक भी इस धूप को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खरीफ की फसल के लिए बेहतर मानते हैं।

गरियाबंद ब्लॉक के 8 ग्राम पंचायत गुजरा से लेकर जंगल धवलपुर तक के पैरी नदी के बेल्ट में बसे 21 गांव में 1183 किसानों के बीच काम कर रही है। आज प्रेरक संस्था द्वारा 320 देशी किस्म के धान बीज का संरक्षण कर किसानों की भविष्य को आगे ले जाने के लिए अग्रसर है और किसानों को लगातार यह बताई जा रही है की आधुनिक खेती के दुष्प्रभाव कितना भयानक हो सकते हैं, यह तो समय बताएगा क्योंकि आज हम जिस प्रकार से अपने धरती में जहर उगल रहे हैं, वहीं जहर हमारे शरीर को प्रभावित करते जा रहा है।
गरियाबन्द जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर स्थित आदिवासी ग्राम पंचायत बेगरपाला के ग्रामीणों ने अक्ति त्यौहार पर किसानों द्वारा माटी पूजन धान बुआई किया जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर स्थित आदिवासी बाहुल्य पंचायत बेगरपाला के किसानों द्वारा मंगलवार को अक्ती के शुभ अवसर पर बेगरपाला में किसान समिति एवं मां दंतेश्वरी बीज बैंक के सौजन्य से अक्ति तिहार एवं माटी पूजन कार्यक्रम आयोजित की गई, जिसमें सबसे पहले धान रास का पूजन गांव के झाकर पटेल एवं प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों द्वारा किया गया।
उसके बाद माटी पूजन हेतु गांव के किसानों द्वारा खेत में जाकर पूजा-अर्चना की गई एवं झाखर द्वारा धान की बुवाई कर पुरानी मान्यता के अनुसार नागर जोताई, ढेला-फोड़ाई किया गया। इसके बाद महिला किसानों द्वारा अक्ती के अवसर पर सब्जी बीज जिसमें मखना, लौकी, तोरई, ढोडका एवं नांगर कंद एवं डांग कंद बीज लगाया गया।

कार्यक्रम में गांव के झाखर बिरम सिंह, सोरी पटेल, सुबरन सिंह, सरपंच मनराखन लाल मरकाम प्राकृतिक खेती करने वाले किसान रमन शिवकुमार सुमित्रा बाई लक्ष्मीबाई, मोहनलाल मानसिंह मूंगीबाई एवं प्रेरक संस्था की ओर से रोहिदास यादव कोमल साहू, रामेश्वर, झम्मन, भूपेश्वरी, मकरध्वज, पूर्णिमा श्याम बाई, तिलोत्तमा कमलेश हेमलता उपस्थित रहे।
किसानों रामलाल साहू, धनेश निर्मलकर, मनराखन पटेल का कहना है धूप में जमीन जितनी अधिक तपेगी, उतना ही खेतों में खरपतवार और कीड़े कम पनपते हैं। इस दौरान यदि खेतों की अकरस जुताई हो जाए तो यह जमीन के लिए सोने पर सुहागा जैसा काम करती है। अप्रैल का महीना इस वर्ष बहुत तपा है। या यूं कहें कि बैशाख का महीना जेठ की तरह तप रहा है तो गलत नहीं होगा।
मौसम की वेबसाइट एक्यूवेदर के अनुसार इस माह के 30 दिनों में 1200 डिग्री तापमान रहा है। यानि इस माह प्रतिदिन तापमान का औसत 40 डिग्री रहा है। मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा के अनुसार वर्ष 2016, 2017 और 2018 हिट ईयर रहा यानि इन तीन सालों में लगातार सर्वाधिक गर्मी पड़ी है। इसके बाद कमी आई, लेकिन इस वर्ष भी अच्छी गर्मी पड़ रही है।
फसलों में बीमारियां कम आएंगी
कृषि वैज्ञानिक साकेत वर्मा के अनुसार धरती ज्यादा तपने से फसलों में कीड़े, बीमारी, खरपतवार में कमी आएगी। उनके अनुसार जिस एरिया में रबी में धान की फसल ली जाती है, उस क्षेत्र में जमीन को पर्याप्त गर्मी नहीं मिल पाती है, इसके बाद खरीफ में भी यदि धान लगा दिया जाए तो रबी के समय के कीड़े मकोड़े खरीफ में अधिक ताकत से अटैक करते हैं और फिर खरीफ में उस एरिया के धान की फसल में कीट प्रकोप अधिक होता है। फसल बदल लेने से या मृदा निर्जिवीकरण की प्रक्रिया से कीड़े मकोड़े सर्वाइव नहीं कर पाते हैं।

अक्ती से माटी का संबंध
अक्षय तृतीया बैशाख और जेठ के महीने के बीच पड़ती है। इसकी धार्मिक मान्यता भी है। यह माना जाता है इस दिन दिया गया दान पुण्य अक्षय होता है। पहले इसी दिन से किसान अपने आने वाली फसल की तैयारियों में जुट जाते थे। अपने धान के बिजहा को टेस्ट करने के लिए कहीं पर छिडक़ कर देखते थे कि उसके उत्पादन की क्षमता कितनी है।
अकरस जुताई से मिट्टी होती है भुरभुरी
वैज्ञानिक डॉ. साकेत वर्मा के अनुसार जुताई से खेतों की मिट्टी ऊपर आ जाती है। इससे खेतों में रहने वाले कीड़े-मकोड़े भी ऊपर आते हैं तथा धूप अधिक होने के कारण कीट पनपने से पहले ही मर जाते हैं, वहीं घास या खरपतवार भी मर जाते हैं। मरने के बाद ये खेत के लिए खाद का काम करते हैं। इसके अलावा तेज धूप पडऩे से मिट्टी भुरुभुरी तथा उपजाऊ हो जाती है। अकरस जोते गए खेत में कम कीट प्रकोप होता है, रासायनिक व कीटनाशक दवाओं का उपयोग कम करना पड़ता है, यह फसल की सेहत के लिए भी अच्छा होता है।
जमीन का तापमान 3-4 डिग्री अधिक होता है
हवा के अधिकतम तापमान से जमीन का तापमान कम से कम 3 से 4 डिग्री अधिक होता है। यानि यदि हवा का तापमान 40 डिग्री है तो जमीन का तापमान 43-44 डिग्री माना जाता है। धरती जितनी तपेगी, उतने ही खरपतवार व कीट कम पनपेंगे। कीटनाशक का कम प्रयोग करना पड़ेगा।


