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-अमित शाह
पाकिस्तान की यूनिवर्सिटियों से साल 2018 के बाद डिग्री लेने वालों को फॉरन मेडिकल ग्रैजुएट एग्ज़ामिनेशन (FMGE)में बैठने के लिए गृह मंत्रालय से सिक्योरिटी क्लियरेंस लेना होगा.
अंग्रेज़ी अख़बार इकोनॉमिक टाइम्स की ख़बर के अनुसार नेशनल मेडिकल कमीशन और डेंटल काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने इस संबंध में सोमवार को नए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं.
अख़बार के मुताबिक ये कदम मीडिया में आई उन रिपोर्ट्स के बाद उठाया गया है, जिनमें दावा किया गया था कि पाकिस्तान में मेडिकल सीटें जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग अलगाववादी संगठनों को आवंटित की गईं, जिन्होंने प्रतियोगियों से पैसे लेकर इन्हें बेचा और इन पैसों का इस्तेमाल चरमपंथ को बढ़ावा देने में किया.
इकोनॉमिक टाइम्स ने ही 27 अप्रैल को एक ख़बर छापी थी, जिसके अनुसार केंद्र सरकार पाकिस्तान की मेडिकल डिग्रियों को अमान्य करार देने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है.
एनएमसी ने नए आदेश में कहा है, "सभी संबंधितों को सलाह दी जाती है कि वो मेडिकल शिक्षा के लिए पाकिस्तान न जाएं. भारत का कोई भी नागरिक/विदेश में रहने वाला भारतीय, जो पाकिस्तान के किसी भी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस, बीडीएस या उसके समकक्ष मेडिकल कोर्स में दाख़िला लेना चाहता है, वो पाकिस्तान की शिक्षा के आधार पर एफ़एमजीई में बैठने या भारत में रोज़गार पाने के योग्य नहीं होगा. (bbc.com)


