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अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ लाउडस्पीकर विवाद पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को कहा कि इसे धार्मिक स्थलों से हटाने का कोई सवाल ही नहीं है और बिहार सरकार किसी भी धार्मिक प्रथा में 'हस्तक्षेप' नहीं करेगी.
उन्होंने पूजा स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के विवाद को भी 'बकवास' बताया.
पूर्णिया में देश का पहला ग्रीनफील्ड अनाज आधारित इथेनॉल संयंत्र लॉन्च करने पहुंचे नीतीश ने पत्रकारों से कहा, "यह फ़िज़ूल की बात है. बिहार में हमलोग किसी भी धर्म के मामले में हस्तक्षेप नहीं करते हैं. सभी को अपना धर्म मानने का पूरा अधिकार है."
इससे पहले बिहार बीजेपी के नेता जनक राम के शुक्रवार को कहा कि अगर उत्तर प्रदेश में लाउडस्पीकर पर कानून आया है, तो इसका असर बिहार में भी होगा. देश के कानून से बड़ा कोई धर्म नहीं है. देश और राज्य कानून से शासित हो रहे हैं. केंद्र और राज्य के नेता इस पर विचार करने और बिहार में इसे लागू करने के लिए एक साथ बैठेंगे.
पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकरों को हटाने का फ़ैसला लिया है. जिसके बाद से देश में लाउडस्पीकर को लेकर बहस तेज़ हो गई है.
अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, उन्नाव ज़िले के बांगरमऊ इलाके के एक निजी अस्पताल में नौकरी के पहले दिन ही 18 साल की नर्स के साथ कथित तौर पर गैंगरेप किया गया और उसकी हत्या कर दी गई.
बांगरमऊ थाने के प्रभारी अधिकारी गजन्नाथ शुक्ला ने बताया कि महिला के परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. पीड़िता के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है.
उन्होंने कहा, "हम मामले की जाँच कर रहे हैं. मृतक की मां ने प्राथमिकी में अस्पताल के मालिक समेत चार लोगों को नामजद किया है.''
शनिवार की सुबह करीब 11 बजे कुछ लोगों ने पीड़िता का शव अस्पताल की बाहरी दीवार से रस्सी से लटकता पाया. रस्सी को इमारत की छत पर एक खंभे से निकली लोहे की छड़ से बांधा गया था.
पुलिस ने बताया कि लड़की ने 29 अप्रैल को अस्पताल में नौकरी शुरू की थी और रात की शिफ़्ट में थी. अस्पताल कुछ दिन पहले 25 अप्रैल को खुला था, जहां महिला को नर्स की नौकरी मिली थी. लड़की ने अस्पताल के पास ही किराए पर एक कमरा लिया था. (bbc.com)


