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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 24 अप्रैल। धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम युवक से विवाह करने वाली युवती को हाईकोर्ट ने पति के सुपुर्द करने का आदेश दिया है। युवती के पति ने इस मामले में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगाई थी।
बसना महासमुंद के मोहम्मद इरफान (28 वर्ष) ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि उसकी पत्नी हिंदू थी जिसने स्वेच्छा से 2021 में मुस्लिम धर्म स्वीकार किया और रीति रिवाज के अनुसार निकाह किया। इसकी जानकारी मिलने पर लड़की के पिता ने थाने में शिकायत कर दी और इसे सांप्रदायिक रूप देकर विवाद खड़ा कर दिया। इसके बाद युवती को नारी निकेतन भेज दिया गया।
याचिकाकर्ता का पहले भी एक विवाह हो चुका है, जिससे उसके दो बच्चे हैं। विवाद के कारण उसकी पहली पत्नी उससे अलग रहती है। कोर्ट के सामने यह प्रश्न विचार के लिए आया कि क्या एक पत्नी के रहते हुए वह दूसरा विवाह कर सकता है। याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि मुस्लिम लॉ में इसकी अनुमति है। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि क्या वह अपनी पहली पत्नी को भरण पोषण दे रहा है। उसने इस पर हामी भरी।
धर्म परिवर्तन कर विवाह करने वाली युवती ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिए हाईकोर्ट को बताया कि उसने बिना किसी दबाव कि अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन किया है और शादी की है। वह अपने पति के पास ही रहना चाहती है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि युवती बालिग है और अपने मर्जी से उसने धर्म परिवर्तन तथा विवाह किया है, अतः उसे उसके पति के साथ रहने का अधिकार है।


