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जामनगर में डब्ल्यूएचओ केंद्र की स्थापना नए युग की शुरुआत: मोदी
20-Apr-2022 9:59 AM
जामनगर में डब्ल्यूएचओ केंद्र की स्थापना नए युग की शुरुआत: मोदी

जामनगर (गुजरात), 19 अप्रैल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि यहां डब्ल्यूएचओ वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र (जीसीटीएम) की स्थापना से विश्व में पारंपरिक चिकित्सा के युग की शुरुआत होगी।

मोदी ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस गेब्रेयेसस और मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ के साथ केंद्र की आधारशिला रखी।

बांग्लादेश, नेपाल और भूटान के प्रधानमंत्रियों - शेख हसीना, शेर बहादुर देउबा और लोतेय शेरिंग ने रिकॉर्ड किए गए अपने संदेशों में इस परियोजना के लिए भारत को बधाई दी। इन संदेशों को कार्यक्रम में सुनाया गया।

उल्लेखनीय है कि मोदी और गेब्रेयेसस के बीच बैठक भारत द्वारा देश में कोविड-19 से संबंधित मौतों की संख्या का अनुमान लगाने संबंधी डब्ल्यूएचओ की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताए जाने के कुछ दिनों बाद हुई।

मोदी ने इस अवसर पर कहा, ‘‘जब भारत अभी अपनी स्वतंत्रता के 75वें वर्ष का जश्न मना रहा है, इस केंद्र के लिए यह शिलान्यास समारोह अगले 25 वर्षों के दौरान दुनिया में पारंपरिक चिकित्सा के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘समग्र स्वास्थ्य सेवा की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए मुझे विश्वास है कि पारंपरिक चिकित्सा और यह केंद्र 25 साल बाद दुनिया के प्रत्येक परिवार के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो जाएगा, जब भारत आजादी के 100 साल का जश्न मनाएगा।’’

उन्होंने कहा कि हालांकि ‘रोगमुक्त’ होना महत्वपूर्ण है, लेकिन अंतिम लक्ष्य ‘अच्छा स्वास्थ्य’ होना चाहिए।

मोदी ने कहा, ‘कोविड-19 महामारी के दौरान, हमने स्वास्थ्य के महत्व को महसूस किया। यही कारण है कि दुनिया स्वास्थ्य सेवा प्रदायगी के नए रास्ते तलाश रही है।’

प्राचीन शास्त्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आयुर्वेद और अन्य भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियां केवल उपचार तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें समग्र विज्ञान माना जाता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय पारंपरिक ज्ञान आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी नयी बीमारियों और रोगों से निपटने में अहम भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने मोटा अनाज को महत्व देने संबंधी भारत के प्रस्ताव को स्वीकार करने और 2023 को अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष घोषित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र का धन्यवाद व्यक्त किया।

मोदी ने कहा, ‘भारत में एक समय था जब हमारे बुजुर्ग मोटे अनाज के उपयोग पर जोर देते थे। लेकिन हमने गुजरते वर्षों में इसके उपयोग में गिरावट देखी। लेकिन लोग एक बार फिर इसके बारे में बात कर रहे हैं। मुझे खुशी है कि संयुक्त राष्ट्र ने भी हमारे आहार में मोटे अनाज के इस्तेमाल को लोकप्रिय बनाने के लिए भारत के प्रस्ताव को स्वीकार किया है।’

उन्होंने उपस्थित लोगों को सूचित किया कि वर्ष 2023 को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष घोषित किया गया है।

मोदी ने कहा कि आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों पर आधारित ‘फॉर्मूलेशन’ की आज दुनियाभर में भारी मांग में है।

उन्होंने कहा कि योग दुनियाभर में मधुमेह, मोटापा, अवसाद और ऐसी कई बीमारियों से लड़ने में लोगों की मदद कर रहा है। प्रधानमंत्री ने आशा व्यक्त की कि केंद्र विश्व स्तर पर योग को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

प्रधानमंत्री ने डब्ल्यूएचओ-जीसीटीएम के लिए भी पांच लक्ष्य निर्धारित किए। उन्होंने कहा, ‘‘आपका पहला लक्ष्य दुनिया में उपलब्ध सभी पारंपरिक दवाओं का एक व्यापक डेटाबेस तैयार करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करना होना चाहिए। इस केंद्र में ऐसे सभी पारंपरिक ज्ञान का वैश्विक भंडार होना चाहिए। इससे हमें विभिन्न देशों की पारंपरिक चिकित्सा के बारे में अगली पीढ़ियों के लिए इस ज्ञान को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।’’

उन्होंने कहा कि जीसीटीएम को पारंपरिक दवाओं के परीक्षण और प्रमाणन के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक स्थापित करने की दिशा में भी काम करना चाहिए।

मोदी ने कहा, ‘इससे पारंपरिक दवाओं के बारे में विश्वास पैदा करने में मदद मिलेगी। हालांकि भारत की कई पारंपरिक दवाएं विदेशों में लोकप्रिय हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मानकों की कमी के कारण आपूर्ति सीमित है।’

तीसरे लक्ष्य के रूप में प्रधानमंत्री ने केंद्र को पारंपरिक चिकित्सा महोत्सव जैसे वार्षिक कार्यक्रमों का आयोजन करने का सुझाव दिया ताकि दुनियाभर के विशेषज्ञ एक साथ आ सकें।

उन्होंने कहा, ‘आपका चौथा उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा में अनुसंधान के लिए धन जुटाना होना चाहिए। जैसे फार्मा क्षेत्र को अनुसंधान के लिए अरबों का धन मिलता है, हमें इस क्षेत्र के लिए समान संसाधन विकसित करने की आवश्यकता है।’

अंत में, प्रधानमंत्री ने केंद्र से कुछ विशिष्ट बीमारियों के लिए ‘समग्र उपचार प्रोटोकॉल’ विकसित करने का भी आग्रह किया।

मोदी और डॉ. गेब्रेयेसस जामनगर में ऐसे समय एक साथ दिखे जब भारत ने देश में कोविड-19 मृत्यु दर का अनुमान लगाने संबंधी डब्ल्यूएचओ की कार्यप्रणाली पर शनिवार को सवाल उठाते हुए कहा था कि इस तरह के गणितीय मॉडलिंग को विशाल भौगोलिक आकार और जनसंख्या वाले देश में मृत्यु के आंकड़ों का अनुमान लगाने के लिए लागू नहीं किया जा सकता है।

वहीं गेब्रेयेसस ने यहां कहा कि पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियां देशों को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करने के उनके लक्ष्यों में मदद कर सकती हैं।

डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने अपने संबोधन में कहा कि यह केंद्र पारंपरिक चिकित्सा को मजबूत करने के लिए विज्ञान की शक्ति का उपयोग करने में देशों की मदद करेगा, और इसका पूरा ध्यान साक्ष्य, डेटा, और नवोन्मेष पर होगा।

उन्होंने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियां सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी चिकित्सा सेवाओं तक समान पहुंच में सुधार करके देशों को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की ओर बढ़ने में मदद कर सकती हैं।

बैठक के बाद मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘ डॉ टेड्रोस से मिलकर हमेशा खुशी होती है। स्वास्थ्य क्षेत्र को और मजबूत करने पर विचार विमर्श किया। वह हमेशा अपने जीवन पर भारतीय शिक्षकों के प्रभाव से आनंदित होते हैं। और आज उन्हें उनके गुजराती कौशल के लिए भी बहुत प्रशंसा मिली।”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ट्वीट किया कि बैठक में मोदी ने ग्लोबल सेंटर के उद्देश्यों को हासिल करने के लिए प्रतिबद्धता और समर्थन व्यक्त किया। (भाषा)


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