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एमपी के बाद यूपी में भी गायों और गोबर के दिन फिरेंगे
19-Apr-2022 3:59 PM
एमपी के बाद यूपी में भी गायों और गोबर के दिन फिरेंगे

योगी सरकार ने डीएम को गाय पकड़ने का काम सौंपा, एक लाख बनेंगे गौठान

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर/लखनऊ,19 अप्रैल।
उत्तरप्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने आवारा पशुओं की समस्या से निजात पाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की तरह ही गोधन न्याय योजना लागू कर दी है। गौठानों में गायों को लाने की जिम्मेदारी जिला अधिकारियों को दी गई है। किसानों से गोबर की खरीदी की जाएगी और वर्मी कम्पोस्ट भी तैयार किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ सरकार ने 20 जुलाई 2020 को जब किसानों से दो रुपये किलो में गोबर खरीदने की घोषणा की थी तो विपक्षी दल भाजपा ने इसके औचित्य पर सवाल उठाया था। पर भाजपा शासित राज्यों में भी इस योजना को लागू किया जा रहा है। बीते दिनों हुए उत्तरप्रदेश विधानसभा के चुनाव में आवारा पशुओं, खासकर गायों के कारण फसलों को हो रही क्षति एक बड़ा चुनावी मुद्दा था। इसके चलते कई जगह भाजपा नेताओं को प्रचार के दौरान विरोध का सामना भी करना पड़ा था। समस्या की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि अगली सरकार बनने के बाद इस समस्या का समाधान किया जाएगा। इसी के क्रम में यूपी सरकार ने 100 दिनों के भीतर प्रदेश में 50 हजार शेल्टर बनाने का निर्णय लिया है। छह माह के भीतर यह संख्या 1 लाख तक पहुंचा दी जाएगी। यह छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बनाए गये गौठानों की तरह ही होगा, जिनमें गायों के लिए शेड, चारा और पानी की व्यवस्था होगी। यही नहीं छत्तीसगढ़ सरकार से एक कदम आगे बढ़ते हुए यूपी सरकार ने प्रत्येक जिले में डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट को आवारा गायों को शेल्टर तक पहुंचाने का लक्ष्य दे दिया है। 16 अप्रैल से लागू आदेश में हर दिन उन्हें कम से कम 10 गायों को शेल्टर तक पहुंचाने कहा गया है। उत्तरप्रदेश की योजना इस मायने में भी अलग है कि पूरे राज्य में 50 बड़े गऊ अभयारण्य बनाये जाएंगे। एक-एक अभयारण्य में हजारो की संख्या में गायों को शिफ्ट किया जा सकेगा। छत्तीसगढ़ की योजना में तैयार गौठानों में किसानों के मवेशियों को रखने की बात कही गई है, जबकि आवारा पशुओं को समय-समय पर जंगलों में छोड़ दिया जाता है। आवारा पशुओं के लिए अलग से अभयारण्य तैयार नहीं किये जा रहे हैं।

पशुपालक गायों को दूध देना बंद करने के बाद खुला न छोड़ें इसके लिए गोबर खरीदी योजना लागू की गई है। साथ ही इसे ग्रामीणों की आय का अतिरिक्त स्त्रोत बनाया जा रहा है। यह भी यूपी सरकार के अगले एजेंडे में शामिल है। यूपी सरकार बायोगैस प्लांट बनाने तथा सीएनजी उत्पादन की योजना पर काम कर रही है। इसके अलावा गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनाने का निर्णय लिया गया है। छत्तीसगढ़ में गोबर से कंडे, दीये, गोकाष्ठ, वर्मी कंपोस्ट बनाने का काम चल रहा है। राज्य में गौठानों को आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनाने की योजना पर काम हो रहा है। यूपी सरकार ने अभी इस बारे में कोई घोषणा नहीं की है। वहां अभी गौठानों का निर्माण ही नहीं हो पाया है। संभवतः आगे विचार हो।

उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने घोषणा की है कि शहरी क्षेत्रों में आवारा पशुओं विशेषकर गायों को खुला छोड़ने से उत्पन्न हो रही समस्या को देखते हुए गोबर खरीदने की योजना लागू की जाएगी। पचमढ़ी में शिवराज मंत्रिमंडल की बैठक में 22 मार्च को इस पर निर्णय लिया गया। गोबर से यहां पर भी गो काष्ठ और खाद बनाने का निर्णय लिया गया है। इंदौर में बायोगैस से संयंत्र चलाने का एक प्रयोग भी किया जा चुका है। मध्यप्रदेश सरकार ने गौ-मूत्र को भी खरीदने का निर्णय ले लिया है।

इधर भाजपा शासित गुजरात में लागू योजना अलग तरह की है। आवारा पशुओं विशेषकर गायों की समस्या को देखते हुए बीते 4 अप्रैल को विधानसभा में गुजरात मवेशी नियंत्रण विधेयक (शहरी क्षेत्र) पारित किया गया है। इसके तहत शहरी क्षेत्रों में मवेशी टैगिंग को अनिवार्य कर दिया गया है। टैगिंग नहीं कराने पर मवेशी पालकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। गुजरात के गौपालक मालधारी समुदाय ने इसे काला कानून बताया है और कांग्रेस ने भी विधेयक का विरोध किया।


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