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ममता-मोदी की प्रतिष्ठा का सवाल है आसनसोल सीट
31-Mar-2022 1:22 PM
ममता-मोदी की प्रतिष्ठा का सवाल है आसनसोल सीट

  उपचुनाव विशेष रिपोर्ट 3   

-लोकसभा उपचुनाव में आमने-सामने तृणमूल से अभिनेता शत्रुघ्न सिंहा और भाजपा विधायक अग्निमित्रा पाल

आसनसोल से बिकास के शर्मा

पश्चिम बंगाल की सत्ताशीन पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने पश्चिम बर्धमान जिले की आसनसोल लोकसभा सीट से बॉलीवुड स्टार और पूर्व भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री शत्रुघ्न सिंहा को मैदान में उतारा है, जहां 12 अप्रैल को उपचुनाव होने हैं। भाजपा की ओर से फैशन डिजाइनर से राजनेता बनी अग्निमित्रा पॉल मैदान में उतरीं हैं। वे वर्तमान में आसनसोल दक्षिण सीट से विधायक भी हैं। 34 वर्षों तक एकछत्र राज करने वाली सीपीएम ने अपने स्थानीय नेता पार्थ मुखर्जी को चुनावी अखाड़े में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने कई दिनों के विलंब के बाद काफी विचार-विमर्श कर प्रोसेनजीत पुईतंडी पर दांव लगाया है। नामांकन डालने वालों में एक भारतीय न्याय अधिकार रक्षा पार्टी सहित तीन निर्दलीय भी शामिल हैं किंतु प्रमुख मुकाबला वर्तमान में सीट पर कब्ज़ा जमाये बैठी भाजपा और राज्य की सत्ता पर आसीन तृणमूल कांग्रेस के बीच ही दिखाई दे रहा है। दरअसल सबसे पहले तृणमूल सुप्रीमो सह राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सिने अभिनेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री शत्रुघ्न सिंहा को लोकसभा का टिकट देकर सभी को चौंका दिया था क्यों कि उस वक्त तक श्री सिंहा कांग्रेस के साथ बने हुए थे। श्री सिंहा के नाम की घोषणा के बाद भाजपा के लिए प्रत्याशी चयन का काम कठिन हो गया और ऐसा माना जा रहा था कि हिंदी भाषियों को लुभाने के लिए खेले गये ममता के कार्ड की काट के रूप में भाजपा तृणमूल से ही दल में शामिल हुए आसनसोल के पूर्व मेयर जितेंद्र तिवारी को प्रत्याशी बनाएगी। इसके वाजिब कारण भी थे क्यों कि श्री तिवारी ने हालिया संपन्न आसनसोल नगर निगम चुनाव में पार्टी को नेतृत्व प्रदान किया था साथ ही अपने पत्नी चैताली तिवारी एवं सहयोगी गौरव गुप्ता की जीत भी सुनिश्चित करवाई थी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। जहां ममता बनर्जी ने विगत दो लोकसभा चुनावों में हिंदी वोटों का तृणमूल से भाजपा की ओर झुकाव महसूस किया था और बिहारी बाबु के नाम से लोकप्रिय श्री सिंहा को टिकट देकर चुनावी अखाड़ा का शंखनाद किया, वहीं भाजपा ने बांग्ला भाषी मतदाताओं को देखते हुए स्थानीय विधायक सुश्री पाल पर भरोसा जताया। ममता ने पिछला विधानसभा चुनाव ‘बांग्ला निजेर मेयेके चाये’ (बंगाल अपनी बेटी को चाहता है) के सहारे भाजपा को 77 सीटों पर समेत दिया था वहीँ आसनसोल लोकसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी सुश्री पाल खुद को आसनसोल की बेटी बताते हुए तृणमूल नेत्री के जवाब में ‘आसनसोल निजेर मेये के चाये’ (आसनसोल अपनी बेटी को चाहता है) का नारा बुलंद कर दिया है। सुश्री पाल केवल मंदिरों को ठिया बनाकर चुनावी माहौल को हिंदुत्व से जोड़ना चाह रहीं हैं, ठीक उसके बरक्स तृणमूल शत्रुघ्न सिंहा को बाहरी कहने की काट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात से होकर वाराणसी से चुनाव लड़ने को मुद्दा बना रही है। कुल मिलाकर आसनसोल में चुनावी लडाई बड़ी रोचक हो चली है। शत्रुघ्न सिंहा का स्टारडम भले इतिहास की बात रह गया हो लेकिन जनसभाओं में होने वाली भीड़ उन्हें जीत के प्रति इतना आश्वस्त कर रही है कि वे सभाओं में कहने से नहीं चूक रहे कि विजय तो तय है, उन्हें केवल 16 अप्रैल का इंतजार है।

ज्ञातव्य हो कि आसनसोल सीट पिछले साल अक्टूबर में पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद बाबुल सुप्रियो के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। श्री सुप्रियो ने 2014 और 2019 में सीट पर क्रमशः 70 हजार एवं 1.97 लाख मतों से जीत हासिल की थी। भाजपा छोड़ने के पहले उन्होंने मार्च-अप्रैल 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कोलकाता की टॉलीगंज सीट से चुनाव लड़ा था और पराजय चखी थी। जिसके बाद सितंबर 2021 में टीएमसी में शामिल हो गए। सुप्रियो अब कोलकाता के बालीगंज विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में टीएमसी उम्मीदवार हैं। यह सीट राज्य के पूर्व मंत्री और अनुभवी टीएमसी नेता सुब्रत मुखर्जी के पिछले साल नवंबर में निधन के बाद खाली हुई थी। आसनसोल लोकसभा सीट और बालीगंज विधानसभा सीट के अलावा, 12 अप्रैल को तीन अन्य विधानसभा क्षेत्रों - महाराष्ट्र के कोल्हापुर उत्तर, छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ और बिहार के बोचाहा के लिए उपचुनाव होंगे।

बंगाल का दूसरा शहर आसनसोल
आसनसोल शहर, जो आसनसोल लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है, एक टियर दो शहर है और झारखंड के साथ पश्चिम बंगाल की सीमा के करीब महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन भी है। यह कोलकाता के बाद पश्चिम बंगाल का दूसरा सबसे बड़ा और दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला शहर है। 2011 की जनगणना के अनुसार जहां शहर में 12 लाख से अधिक लोग रहते थे वहीं सात विधानसभा सीट वाले इस लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव आयोग के आंकड़ों अनुसार लगभग 15 लाख पात्र मतदाता हैं। मतदाताओं में कोयला खदान श्रमिकों, कारखाना मजदूरों, स्क्रैप डीलरों, गल्ला व्यापारियों और अल्पसंख्यकों का मिश्रण है। लगभग 50 प्रतिशत मतदाता हिंदी भाषी हैं, जो पड़ोसी राज्य झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश सहित राजस्थान, हरयाणा, गुजरात आदि इलाकों के मूल निवासी हैं लेकिन 100 से भी अधिक वर्षों से यहां निवासरत हैं। जनसांख्यिकी और बड़ी संख्या में कारखाने के श्रमिकों की उपस्थिति से निर्वाचन क्षेत्र हमेशा वामपंथ का गढ़ रहा है। सीपीएम ने 1971 और 1977 में सीट जीती और फिर 1989 से 2014 तक लगातार आठ बार सीट पर विजय पाई। लेकिन 2014 की मोदी लहर में सीपीएम से यह सीट भाजपा ने जीत ली थी।

चुनाव में भाजपा ने फेंका है पासा
2014 के लोकसभा चुनावों में, आसनसोल उन दो सीटों में से एक थी जो भाजपा ने पश्चिम बंगाल में जीती थी। दूसरी दार्जिलिंग थी, जिसे पार्टी ने 2009 में भी जीता था। 2014 में दार्जिलिंग में भाजपा उम्मीदवार एसएस अहलूवालिया को पार्टी के तत्कालीन गठबंधन सहयोगी गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) से समर्थन मिला लेकिन आसनसोल में मिली भाजपा की जीत में श्रेय भाजपा के अपने बल का था। 2019 के संसदीय आम चुनाव में भाजपा ने पश्चिम बंगाल में आसनसोल सहित 18 सीटें जीतकर शानदार प्रदर्शन किया। पार्टी 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को हराने में विफल रही, लेकिन आसनसोल में सात विधानसभा क्षेत्रों में से दो- कुल्टी और आसनसोल दक्षिण- पर जीत हासिल की। श्री सुप्रियो के भाजपा से अलग होने के साथ ही  आसनसोल भगवा खेमे के लिए एक प्रतिष्ठा का सवाल बनी हुई है। कुल्टी क्षेत्र से भाजपा विधायक डॉ अजय पोद्दार ने कहा कि बाबुल के पार्टी छोड़ने से लोकसभा चुनाव ही नहीं किसी भी चुनाव पर कोई असर नहीं होने वाला क्यों कि भाजपा सांगठनिक बल पर चुनावी मैदान में उतरी है। उन्होंने कहा कि अग्निमित्रा एक जुझारू नेत्री हैं और मतदाता तृणमूल के गुंडाराज के खिलाफ उन्हें ही वोट डालेंगे।

ममता-शत्रुघ्न हेतु जीवन-मरण का प्रश्न
आसनसोल उपचुनाव टीएमसी के लिए भी सम्मान की लड़ाई है। पार्टी को उम्मीद है कि शत्रुघ्न सिंहा की स्टार इमेज और निर्वाचन क्षेत्र के हिंदी भाषियों के बीच उनकी अपील भाजपा से सीट छीनने में मददगार होगी। पार्टी विधानसभा चुनावों के बाद से हर चुनाव जीत रही है - उपचुनाव, सभी निकाय चुनाव और कोलकाता नगर निगम के चुनाव - और आसनसोल लोकसभा क्षेत्र के उपचुनाव में उसी लहर के भरोसे अपना विजई पताका लहराना चाहती है। आसनसोल उत्तर क्षेत्र से विधायक सह राज्य के कानून मंत्री मलय घटक की मानें तो शत्रुघ्न सिंहा को बाहरी कहना भाजपा की सबसे बड़ी भूल साबित हुई है क्यों कि वे एक राष्ट्रीय स्तर के नेता हैं। उन्होंने कहा कि श्री सिंहा बंगाल की संस्कृति से बचपन से जुड़े रहे हैं, उन्होंने फिल्में भी कीं हैं और कोयला क्षेत्र की समस्याओं पर बनी कालका और काला पत्थर में शानदार अभिनय भी किया था। बाहरी के प्रश्न पर शत्रुघ्न सिंहा ने कहा कि अगर मैं बाहरी हूँ तो सबसे पहले भाजपा यह सोचे की प्रधानमंत्री बाहरी हैं अथवा नहीं? श्री सिंहा ने कहा कि सादगी एवं साहस की मूर्ति ममता बनर्जी आज राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष का एकमात्र सर्वमान्य चेहरा हैं और उनके हाथों को मजबूत करने ही वे आसनसोल के चुनावी मैदान से अभियान शुरू कर चुके हैं।

शिल्पांचल के नाम से मशहूर आसनसोल की राजनीति को दो दशक से देखने वाले वरिष्ठ पत्रकार एवं दैनिक आर्थिक धारा के संपादक डॉ प्रदीप कुमार सुमन की मानें तो ममता बनर्जी की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं के लिए राज्य में भाजपा के पदचिह्न को कम करना उनके लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आसनसोल में जीत टीएमसी के लिए सबसे बड़ी जीत होगी क्यों कि हाल में राज्यों में हुए चुनावों में भाजपा ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है, जिसकी वजह से भगवा पार्टी के कार्यकर्ताओं के हौसले बुलंद हैं।

शांतिपूर्ण चुनाव कराने को आई सात कंपनियां
आसनसोल लोकसभा उपचुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से इलाके में सीआरपीएफ एवं अन्य केंद्रीय वाहिनी का आना शुरू हो गया है। बुधवार को क्षेत्र में स्थानीय थानों की मदद से बटालियन जवानों ने रूट मार्च भी शुरू कर दिया है। आसनसोल रेलवे स्टेशन के अंदर और बाहर केवल जवान ही जवान देखे जा रहे हैं वहीं स्कूल भवनों में भी उनके ठहरने की व्यवस्था की जा रही है। सीआरपीएफ के एक अधिकारी ने बताया कि सीआरपीएफ की सात कंपनी आई है, वह लोग नैनीताल से पहले बरेली स्टेशन होते हुए यहां आयें हैं। आसनसोल स्टेशन से ही जवान अन्य स्थानों के लिए रवाना हो रहे हैं।


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