ताजा खबर

गर्भधारण की कोशिश करने वाली महिलाओं को महंगी प्रक्रियाओं से दूर रहना चाहिए
31-Mar-2022 11:04 AM
गर्भधारण की कोशिश करने वाली महिलाओं को महंगी प्रक्रियाओं से दूर रहना चाहिए

मैट कॉटरिल, लीड्स विश्वविद्यालय

लीड्स, मार्च 31 । जबकि इन-विट्रो निषेचन (आईवीएफ) जैसी प्रक्रियाओं ने प्रजनन की समस्याओं से जूझने वाले लोगों को एक परिवार शुरू करने में मदद करने की संभावना में काफी सुधार किया है, लेकिन इसकी सफलता दर मात्र 24% के आसपास ही है। यही कारण है कि आईवीएफ के माध्यम से गर्भ धारण करने की कोशिश कर रहे कुछ लोग बच्चे होने की संभावनाओं को बढ़ाने की उम्मीद में तथाकथित अतिरिक्त उपचारों के बारे में सोच सकते हैं।

ऐसी कई ऐड-ऑन प्रक्रियाएं हैं जो निजी और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रदाताओं दोनों द्वारा पेश की जा रही हैं। लेकिन इन प्रक्रियाओं के साथ समस्या यह है कि वर्तमान में इस बात के बहुत कम प्रमाण हैं कि वे वास्तव में बच्चा पैदा करने की संभावनाओं में सुधार करते हैं। इसके बावजूद, यूके के एनएचएस सहित स्वास्थ्य प्रदाता मरीजों पर इन महंगी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।

इसलिए यदि आप आईवीएफ से जुड़ी अतिरिक्त प्रक्रियाओं पर विचार कर रहे हैं, तो यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप ठीक से समझें कि वे क्या हैं, और वे आपके गर्भधारण की संभावना को क्यों नहीं बढ़ा सकते हैं। यहां चार सबसे सामान्य प्रक्रियाएं हैं:

टाइम लैप्स इमेजिंग

टाइम-लैप्स इमेजिंग एक गैर-इनवेसिव तकनीक है। इसमें कैमरे लगे विशेष रूप से तैयार इनक्यूबेटर में भ्रूण को रखा जाता है। यह कैमरा लगातार अंतराल पर प्रत्येक भ्रूण की तस्वीरें लेता है, जिससे भ्रूणविज्ञानी एक ऐसे भ्रूण का चयन कर सकते हैं जिसके बच्चे के रूप में विकसित होने की सबसे अधिक संभावना है।

पारंपरिक आईवीएफ प्रक्रियाओं के दौरान, भ्रूण को इनक्यूबेटर से हटा दिया जाता है और माइक्रोस्कोप के तहत जांच की जाती है। तो टाइम लैप्स इमेजिंग का लाभ यह है कि भ्रूण स्थानांतरण तक भ्रूण को इनक्यूबेटर में अबाधित छोड़ा जा सकता है।

दुर्भाग्य से, वर्तमान में इस बात का कोई सबूत नहीं है कि यह तकनीक पारंपरिक आईवीएफ विधियों की तुलना में बच्चे के जन्म की संभावनाओं में सुधार करती है।

भ्रूण की जांच

पीजीटी-ए (भ्रूण बायोप्सी के बाद की जांच) इस प्रक्रिया में एक भ्रूण से कई कोशिकाओं को लेना और गुणसूत्रों की संख्या का आकलन करना शामिल है। इस विश्लेषण का उपयोग यह दिखाने के लिए किया जा सकता है कि भ्रूण में गुणसूत्रों का सामान्य या असामान्य जोड़ा है या नहीं।

परंपरागत रूप से, यह उपचार उन महिलाओं को दिया जाता है जो अधिक उम्र की होती हैं, आमतौर पर 37 वर्ष से अधिक, क्योंकि उनके भ्रूण में गुणसूत्र असामान्यताओं की संभावना अधिक होती है। पीजीटी-ए उन रोगियों को भी दिया जाता है जिनका गर्भपात का इतिहास रहा है या जिनके परिवार में ऐनुप्लोइडी (जिनमें गुणसूत्र नहीं हैं या उनमें अतिरिक्त गुणसूत्र हैं) का इतिहास है।

पीजीटी-ए का लाभ यह है कि यह लोगों को आनुवंशिक रूप से सामान्य भ्रूण को स्थानांतरित करने में मदद देता है। मूल्यांकन के पारंपरिक तरीके, जो स्थानांतरण से पहले केवल एक माइक्रोस्कोप के तहत भ्रूण को देखेंगे, इसका पता लगाने में सक्षम नहीं होंते।

हालांकि, वर्तमान में प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल हैं। इस प्रक्रिया में यह अधिक संभावना है कि गुणसूत्रों के एक सामान्य सेट वाले भ्रूण को स्थानांतरित किया जाएगा, लेकिन इस प्रक्रिया को बच्चा होने की संभावना को बढ़ाने के तौर पर नहीं देखा गया है।

एंडोमेट्रियल स्क्रैचिंग

महिला को गर्भवती होने के लिए, भ्रूण को उसके गर्भ के भीतर प्रत्यारोपित करने की आवश्यकता होती है।

लेकिन आईवीएफ चक्र में ऐसा होने की संभावना को बेहतर बनाने के लिए, कुछ क्लीनिक ‘‘एंडोमेट्रियल स्क्रैचिंग’’ नामक एक प्रक्रिया की पेशकश करते हैं। इसमें एक छोटी, प्लास्टिक ट्यूब के साथ एंडोमेट्रियल लाइनिंग को ‘‘खरोचा’’ जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस प्रक्रिया में जहां खरोचा जाता है वहां शरीर मरम्मत तंत्र को सक्रिय करने में मदद करता है।

कहा जाता है कि कोख की सतह की मरम्मत के लिए आवश्यक हार्मोन और प्रोटीन भ्रूण के स्वयं प्रत्यारोपण की संभावनाओं में सुधार करते हैं। उपचार कठिन है और कुछ रोगियों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। यह भी पता नहीं है कि इस प्रक्रिया से भ्रूण को कोई खतरा है या नहीं।

इस प्रक्रिया की पेशकश आमतौर पर केवल उन महिलाओं को की जाती है जो बार-बार आरोपण के प्रयासों में विफल रही हैं। महिलाओं को गर्भ धारण करने में मदद करने के लिए पारंपरिक आईवीएफ विधियों से बेहतर होने का वर्तमान में कोई सबूत नहीं है।

भ्रूण ग्लू

भ्रूण ग्लू भ्रूण को स्थानांतरण से 30 मिनट पहले तक हयालूरोनन तरल के साथ एक कल्चर डिश में रखकर काम करता है। हयालूरोनन हमारे शरीर में प्रचुर मात्रा में होता है और हमारे जोड़ों के बीच पाए जाने वाले द्रव के समान होता है। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से गर्भ में भ्रूण के खुद को प्रत्यारोपित करने की संभावना में सुधार होगा।

शोधकर्ताओं को पूरी तरह से यकीन नहीं है कि हयालूरोनन कैसे काम करता है, लेकिन कई लोगों का मानना ​​​​है कि यह आरोपण के दौरान भ्रूण को अन्य कोशिकाओं से बेहतर तरीके से चिपकाने में मदद करता है। हालांकि, आज तक, किसी भी बड़े अध्ययन में भ्रूण ग्लू से गर्भाधान की संभावना में ज्यादा सुधार नहीं देखा है।

हालांकि गर्भ धारण के लिए सिर्फ यही वैकल्पिक उपचार नहीं हैं, यह ध्यान देने योग्य है कि इस तरह के किसी भी उपचार को ह्यूमन फर्टिलाइजेशन एंड एम्ब्रियोलॉजी अथॉरिटी (एचएफईए) द्वारा ग्रीन लाइट रेटिंग नहीं दी गई है। ग्रीन लाइट रेटिंग केवल उन प्रक्रियाओं को दी जाती है जो पारंपरिक आईवीएफ से परे गर्भधारण की संभावनाओं को बेहतर बनाने में सुरक्षित और प्रभावी मानी जाती हैं।

जबकि फर्टिलिटी क्लीनिक संतान प्राप्ति के लिए प्रयास कर रहे लोगों की मदद कर सकते हैं, यह समझना महत्वपूर्ण है कि इन अतिरिक्त उपायों का पारंपरिक आईवीएफ तकनीकों पर कोई लाभ नहीं है - विशेष रूप से यह देखते हुए कि ये उपचार कितने महंगे हो सकते हैं। अक्सर, एक मानक आईवीएफ चक्र अपने आप में ही सफलता का सर्वोत्तम अवसर प्रदान करता है।(द कन्वरसेशन)


अन्य पोस्ट