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ये कहानी है आज से हजारों साल पुरानी. अत्रि मुनि और उनकी पत्नी अनुसुया के घर एक बच्चे का जन्म हुआ. नाम रखा गया ‘दुर्वासा’. बड़ा होकर वो ‘दुर्वासा ऋषि’ के नाम से जाना गया. दुर्वासा ऋषि के बारे में मशहूर है कि उनमें गुस्सा इतना ज्यादा भरा हुआ था कि भगवान भी उनके श्राप से कांपते थे. विष्णु पुराण में जिक्र है कि जब दुर्वासा ऋषि ने इंद्र को श्राप दिया था, उनका चेहरा गुस्से से लाल हो गया था, नथुने फुफकार रहे थे और पूरा शरीर कंपकंपा रहा था. ऐसा भयानक गुस्सा और लाल चेहरे लिए चिल्लाते हुए लोग आजकल आपको हर ट्रैफिक सिग्नल पर दिख जाएंगे. इतना गुस्सा आता कहां से है इनमें? और क्या होता है हमारे शरीर का हाल जब हम किसी को दिल और आवाज खोलकर गालियां दे रहे होते हैं.
इतना गुस्सा आखिर क्यों आता है?
गुस्सा आने के पीछे की एक बड़ी वजह है नियंत्रण. जब हम चाहते हैं कि कोई खास काम या बात हमारी इच्छा से हो लेकिन ऐसा नहीं होता तो हमें लगता है कि कहीं ना कहीं हमारे नियंत्रण से सबकुछ छूट रहा है. इसे जताने के लिए हमें सही शब्द नहीं मिल पाते तो हम चीखकर, चिल्लाकर और सामने वाले पर गुस्सा दिखाकर अपनी घबराहट को जस्टिफाई करने की कोशिश करते हैं.
दिमाग में मच जाती है युद्ध स्तर की खलबली:
गुस्सा इंसानों का बहुत पुराना स्थायी भाव है. इसी गुस्से में भरकर हम इंसानों से सारे युद्ध लड़े हैं. इसीलिए गुस्से के साथ ही हमारा दिमाग हमें लड़ने के लिए भी तैयार करता है. जब हमें गुस्सा आता है तो हमारे दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं, खून में टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन की मात्रा बहुत बढ़ जाती है, कॉर्टिसोल (जो कि स्ट्रेस हॉर्मोन कहलाता है) की मात्रा भी इसी क्रम में बढ़ने लगती है और दिमाग का बायां हिस्सा अधिक एक्टिवेट हो जाता है.
गुस्से में क्या होता केमिकल लोचा
बढे हुए कॉर्टिसोल के कारण दिमाग की कोशिकाएं जिन्हें न्यूरोन कहा जाता है, बहुत अधिक कैल्शियम अपने भीतर इकठ्ठा करना शुरू कर देती हैं. न्यूरोन्स की यह हरकत हमारे दिमाग के प्री-फ्रंटल कॉर्टेक्स यानी सबसे आगे के हिस्से पर पर्दा डाल देती है. प्री-फ्रंटल कॉर्टेक्स दिमाग का वो हिस्सा होता है जो हमें निर्णय लेने और पॉजिटिव प्लानिंग में मदद करता है. लेकिन गुस्से में दिमाग का यह सोचने वाला हिस्सा काम करना बंद कर देता है और इसीलिए हम अक्सर गलत निर्णय ले लेते हैं.
गुस्से में दिमाग का यह सोचने वाला हिस्सा काम करना बंद कर देता है और इसीलिए हम अक्सर गलत निर्णय ले लेते हैं.
इसके साथ ही बढ़े हुए कॉर्टिसोल के कारण हमारी याद रखने की क्षमता (शॉर्ट टर्म मेमोरी स्टोरेज) भी बंद हो जाती है. यही कारण है कि हमें अक्सर गुस्से में कही गई अपनी ही बात याद नहीं रहती.
तब खून का बहाव हो जाता है तेज
टेस्टोस्टेरोन और कॉर्टिसोल के एक्टिव होने से हमारे शरीर में खून का बहाव तेज हो जाता है. दिल पर ज्यादा बोझ पड़ता है और उसे जल्दी-जल्दी काम करना पड़ता है. इसी कारण ब्लड प्रेशर बहुत बढ़ जाता है और गुस्से में हमारा चेहरा और काम अक्सर लाल हो जाते हैं. जिन लोगों को बहुत अधिक गुस्सा आता है, भविष्य में उन्हें हाइपर-टेंशन और हार्ट-अटैक आने का खतरा होता है.
गुस्सा करने के नुकसान ज्यादा हैं. इसकी अधिकता से कैंसर जैसी बीमारी के होने का भी खतरा ज्यादा हो जाता है.
ज्यादा गुस्सा करने से हो सकता है कैंसर:
सुनने और पढ़ने में यह अटपटा लग सकता है लेकिन हमारी हर फीलिंग का असर पूरे शरीर पर पड़ता है. जब हमें गुस्सा आता है और हम अपने रौद्र रूप में आ जाते हैं, हमारा इम्यून सिस्टम यानी रोग-प्रतिरोधक तंत्र प्रभावित होता है. बीमारियों से लड़ने की हमारी क्षमता कम होने लगती है. समय के साथ शरीर में कैंसर होने का खतरा 40% तक बढ़ जाता है. इसी तरह गुस्से में जब हमारी आंखें लाल हो जाती हैं, आंखों की रक्तवाहिनियों में प्रेशर बढ़ने लगता है और आंखों की रौशनी भी जा सकती है. हड्डियों की डेंसिटी कम होने लगती है, माइग्रेन का खतरा भी बढ़ जाता है.
जब गुस्से में शक्ति के धारण कर लिया था काली रूप:
हिंदू धर्म की मान्यताओं में देवी का काली रूप बहुत भयानक माना जाता है. कारण यह कि इस रूप में देवी गुस्से से भरी हुई अपने दुश्मनों को खत्म करने के लिए तैयार होती है. स्कंद पुराण में देवी के इस रूप का वर्णन किया गया है. युद्ध क्षेत्र में काली देवी अपने दुश्मन रक्तबीज को मारने पहुंची. रक्तबीज नाम के इस राक्षस को यह वरदान था कि जहां भी उसके खून की एक बूंद गिरेगी, उसके जैसे 100 और राक्षस पैदा हो जाएंगे. इसीलिए वो घमंड में हंस रहा था. देवी को आया गुस्सा, उनका चेहरा और आंखें लाल हो गए, नथुने फड़फड़ाने लगे और उन्होंने रक्तबीज का गला काटकर उसका खून पी लिया. इस तरह देवी का रौद्र रूप बहुत ही डरावना माना जाता है.
कैसे करें गुस्से को नियंत्रित:
गुस्सा आना इंसानों की बहुत बेसिक प्रवृति है. लेकिन उसे काबू में करना बहुत जरूरी है, वर्ना हम उसके गुलाम बनकर अपना ही नुक्सान कर बैठते हैं. कहा जाता है कि सभी फीलिंग्स एक दूसरे से जुड़ी हुई होती हैं. गुस्सा भी डर और प्रेम से जुड़ा होता है. गुस्से में हमारा दिमाग भले ही बंद हो जाता है लेकिन शरीर शक्ति से भर जाता है. हालांकि इसे नियंत्रित करना बहुत जरूरी है. इसलिए जिन बच्चों में शुरू से गुस्सा बहुत अधिक होता है, उन्हें मार्शल आर्ट, डांस और स्विमिंग क्लासेज में भेजना एक अच्छा उपाय है. बहुत से लोग अपना गुस्सा नियंत्रित करने के लिए ऊपर वाले उपायों के साथ ही योग, मैडिटेशन और ग्राउंडिंग एक्सरसाइज कर अपने दिल और दिमाग को हिफाजत से रख सकते हैं.


