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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 19 फरवरी। मदनवाड़ा न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट पर शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में गरमा गरम बहस हुई। बताते हैं कि बैठक में सरकार के एक सीनियर मंत्री ने तो रिपोर्ट पर ही सवाल खड़े कर दिए थे। सीएम भूपेश बघेल के हस्तक्षेप के बाद फिर रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रखने का फैसला लिया गया।
कैबिनेट में ताड़मेटला, और मदनवाड़ा न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट पर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक मदनवाड़ा न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट को लेकर काफी देर तक बहस चलती रही। सरकार के एक मंत्री ने तो यहां तक कह दिया कि वो रिपोर्ट से सहमत नहीं है। उन्होंने धारा-8 का उल्लेख करते हुए यह कह गए कि आयोग के गठन में पूरी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है।
मंत्री ने आयोग की रिपोर्ट पर कई सवाल खड़े किए, और यह भी कहा कि तत्कालीन रेंज आईजी मुकेश गुप्ता का बयान तक नहीं लिया गया है। दो सीनियर मंत्रियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, कि आयोग का गठन घटना की जांच के लिए किया गया था। किसी व्यक्ति विशेष की जांच के लिए आयोग का गठन नहीं हुआ था। हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज ने इसकी जांच की है। जांच में किसका बयान लेना चाहिए या नहीं, यह देखना आयोग का काम है। विधानसभा तय करेगी कि रिपोर्ट में आगे क्या कार्रवाई की जाए। सीएम भूपेश बघेल के हस्तक्षेप के बाद रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रखने का फैसला लिया गया।
उल्लेखनीय है कि करीब 13 साल पहले राजनांदगांव जिले के मदनवाड़ा कैम्प से बाहर निकले जवानों पर नक्सलियों ने गोलीबारी की थी, और इसमें एसपी विनोद कुमार चौबे समेत 25 जवान शहीद हो गए थे। इस घटना को लेकर कई तरह के सवाल उठाए गए थे। दिवंगत एसपी विनोद कुमार चौबे की पत्नी के आवेदन पर भूपेश सरकार ने जस्टिस शंभूनाथ श्रीवास्तव की अध्यक्षता में दो साल पहले न्यायिक जांच आयोग बनाई थी। आयोग ने अपनी रिपोर्ट पिछले महीने सरकार को सौंपी थी।


