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हिजाब मामले में चल रही सुनवाई में शुक्रवार को कर्नाटक हाईकोर्ट को बताया गया कि राज्य सरकार के विभिन्न विभाग उनके अंतरिम आदेशों की अलग-अलग व्याख्या कर रहे हैं.
अदालत से कहा गया है कि इस चलते राज्य के विभिन्न हिस्सों में हिजाब पहनने वाली छात्राओं को क्लास रूम में शामिल होने में परेशानी झेलनी पड़ रही है.
एडवोकेट मोहम्मद ताहिर ने हाईकोर्ट को बताया कि उनके अंतरिम आदेश प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों तक ही सीमित थे, जहां कॉलेज डेवलपमेंट कमेटी (सीडीसी) ने यूनिफ़ॉर्म पहनना तय किया था.
लेकिन हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को उर्दू स्कूलों और डिग्री कॉलेजों में भी लागू किया जा रहा है. यहां तक कि शिक्षकों पर भी नियम लगाए जा रहे हैं.
हाईकोर्ट और सरकार ने क्या कहा?
इस पर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रितु राज अवस्थी ने राज्य के एडवोकेट जनरल प्रभुलिंग नवदगी से उनकी राय पूछी. जस्टिस अवस्थी भी उन तीन जजों की स्पेशल बेंच में शामिल हैं, जो हिजाब मुद्दे पर सुनवाई कर रही है.
इस पर एडवोकेट जनरल नवदगी ने अपील करने वाले एडवोकेट मोहम्मद ताहिर से ब्योरा देने को कहा, ताकि वो सरकार से निर्देश जारी करने को कहें कि कोई भी हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना नहीं कर सकता.
पिछले कई दिनों से कर्नाटक के कई ज़िलों से रिपोर्टें मिल रही थीं कि डिग्री कॉलेज के छात्राओं को भी हिजाब पहनकर क्लास रूम में जाने से रोका जा रहा है. हालांकि पिछले कुछ सालों से उन्हें हिजाब पहनकर क्लास करने की अनुमति मिली हुई थी.
मीडिया की एक रिपोर्ट में शुक्रवार को यह भी बताया गया कि विजयपुरा ज़िले की एक छात्रा को 'सिंदूर' लगाने के चलते क्लास करने से रोका गया. (bbc.com)


