खैरागढ़-छुईखदान-गंडई
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
खैरागढ़, 3 फरवरी। महासमुंद जिले के सिरपुर में आयोजित ऐतिहासिक सिरपुर महोत्सव में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ की प्रभावशाली और मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का दिल जीत लिया। महोत्सव के पहले ही दिन विश्वविद्यालय के कलाकारों को विशेष महत्व देते हुए मंच प्रदान किया गया, जहाँ कुलपति प्रो.डॉ. लवली शर्मा सहित लोक संगीत विभाग के विद्यार्थियों ने अपनी उत्कृष्ट कला का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत कुलपति के सितार वादन से हुई। उन्होंने शास्त्रीय राग शुद्ध सारंग दोपहर का राग की सजीव और भावपूर्ण प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति ने शास्त्रीय संगीत की गरिमा और सौंदर्य को बखूबी दर्शाया। छत्तीसगढ़ भगवान श्रीराम का ननिहाल होने के कारण कुलपति ने रघुपति राघव राजा राम के भजन के साथ कार्यक्रम का समापन किया। तबले पर अवध सिंह ठाकुर ने संगत किया।
इसके पश्चात विश्वविद्यालय के लोक संगीत विभाग के विद्यार्थियों ने बारहमासी गीत के अंतर्गत छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति को मंच पर जीवंत कर दिया। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सुआ, गेड़ी, कलशा एवं बैगा नृत्य सहित विभिन्न लोक नृत्यों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। रंग-बिरंगे परिधानों, सजीव भाव-भंगिमाओं और पारंपरिक ताल-लय के साथ प्रस्तुत इन नृत्यों ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया।
सिरपुर महोत्सव के पहले दिन खैरागढ़ विश्वविद्यालय की प्रस्तुतियों ने कला, संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हुए महोत्सव को यादगार बना दिया।


