कवर्धा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बोड़ला, 10 जनवरी। मनरेगा का नाम बदलने के विरोध में कांग्रेस ने देशव्यापी आंदोलन का आगाज़ कर दिया है। इसी कड़ी में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार कवर्धा जिला के जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नवीन जायसवाल ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में ग्राम लालपुर में मनरेगा को लेकर चौपाल का आयोजन किया गया।
चौपाल के माध्यम से कांग्रेस नेताओं ने ग्रामीणों को मनरेगा में हुए बदलाव, उसके संभावित दुष्प्रभाव और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पडऩे वाले असर की विस्तार से जानकारी दी। जिला कांग्रेस कमेटी के द्वारा पूरे जिले में 18 प्रभारी की नियुक्ति की है इन प्रभारी के द्वारा गांव-गांव में जाकर चौपाल लगाना है।
इसी कड़ी में जारी मनरेगा बचाव कार्यक्रम के प्रभारी एवं पूर्व जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रभाती मरकाम, जनपद सदस्य प्रतिनिधि सूरज वर्मा, सहित कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी दीपक माग्रे, बंटी खान और अन्य नेता उपस्थित रहे। चौपाल में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ग्राम पंचायतों की जीवनरेखा है और इसे कमजोर करने की कोशिशें सीधे-सीधे ग्रामीणों की आजीविका पर हमला हैं।
प्रभारी प्रभाती मरकाम ने कहा कि मनरेगा केवल रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीणों के सम्मानजनक जीवन और आर्थिक सुरक्षा की गारंटी है। केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे संशोधनों से मजदूरों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि योजना का नाम बदलकर और जिम्मेदारियों का बोझ राज्यों पर डालकर केंद्र सरकार धीरे-धीरे मनरेगा को समाप्त करने की दिशा में बढ़ रही है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता दीपक माग्रे ने चौपाल में ग्रामीणों से संवाद करते हुए कहा कि मनरेगा को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के उद्देश्य से लागू किया था। इससे गांवों में रोजगार, पलायन पर रोक और पंचायतों की आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिली। आज इसमें कटौती और नियमों में बदलाव से गांवों की विकास गति प्रभावित हो रही है।
बंटी खान ने कहा कि पहले मनरेगा के अंतर्गत रोजगार उपलब्ध कराने की प्रमुख जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होती थी, जिससे समय पर भुगतान और काम सुनिश्चित रहता था। अब जिम्मेदारियों में बदलाव कर केंद्र सरकार पीछे हट रही है, जिसका सीधा नुकसान गरीब और मजदूर वर्ग को उठाना पड़ रहा है। यह बदलाव ग्रामीण हितों के खिलाफ है।
जनपद सदस्य प्रतिनिधि सूरज वर्मा ने कहा कि मनरेगा ग्राम पंचायतों की ‘जान’ है। इसे कमजोर करना पंचायतों की आत्मनिर्भरता पर प्रहार है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर जागरूक हों और मनरेगा बचाव संग्राम में कांग्रेस का साथ दें।
चौपाल में उपस्थित कांग्रेस के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं—श्याम मसराम (पूर्व सरपंचबैरख)जनपद सदस्य, राजेंद्र साहू (पूर्व सरपंच खण्डसरा ), मड़मड़ा से आए कांग्रेस के कार्यकर्ताओं रविंद्र ठाकुर, अयोध्या ठाकुर, नरेश जायसवाल, सुशील निर्मलकर, नरेंद्र मानिकपुरी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने भी विचार रखे।
ग्राम लालपुर के लाल सिंह, बहोरन सिदराम, जनक मरकाम, , धरम सिंह, आजू राम, बहुरीक, सरजू, भगवानी प्रेम सिंह, सरोज कुमार, मानसिंह, गजानन सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने चौपाल में भाग लिया।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि राज्य और केंद्र की भाजपा सरकारें मिलकर मनरेगा को कमजोर कर रही हैं। इससे रोजगार की गारंटी, मजदूरी भुगतान और गांवों में विकास कार्य प्रभावित होंगे। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि मनरेगा बचाव संग्राम के तहत आने वाले दिनों में गांव-गांव चौपाल लगाकर जनता को जागरूक किया जाएगा और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
चौपाल का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि मनरेगा की मूल भावना—रोजगार की गारंटी और ग्रामीण सशक्तिकरण—को बचाने के लिए कांग्रेस हर स्तर पर संघर्ष करेगी।-


