कवर्धा

मां शाकम्भरी महोत्सव पर संगीतमय श्रीराम कथा
08-Jan-2026 3:51 PM
 मां शाकम्भरी महोत्सव पर संगीतमय श्रीराम कथा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बोड़ला, 8 जनवरी। तरेगांव मैदान में प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी मां शाकम्भरी महोत्सव के अवसर पर तीन दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा का आयोजन 3 से 5 जनवरी तक समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से किया गया। श्रद्धा, भक्ति और उल्लास से परिपूर्ण इस आयोजन का समापन सोमवार को हुआ।

महोत्सव के अंतर्गत भव्य कलश यात्रा के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके पश्चात क्षेत्र के प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य मेघानंद शास्त्री द्वारा संगीतमय श्रीराम कथा का वाचन किया गया। उनकी सरल, सहज एवं भावपूर्ण कथा शैली ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। आसपास के दर्जनों गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण हेतु पहुंचे। आचार्य मेघानंद शास्त्री क्षेत्र में रामकथा एवं भागवत कथा के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। कथा के दौरान ग्रामाचार्य के रूप में पंडित बाबूलाल शर्मा (सिलहाटी वाले महाराज) की भी विशेष उपस्थिति रही। कथा प्रवचन के उपरांत रात्रिकालीन भक्ति कार्यक्रमों की श्रृंखला में 3 जनवरी को जय-जय गुरुदेव हरी कीर्तन मानस परिवार, संत रामशरण जी द्वारा भजन-कीर्तन प्रस्तुत किया गया। 4 जनवरी रविवार को आराधना मैजिकल ग्रुप के संतोष यादव द्वारा भजन संध्या का आयोजन हुआ। वहीं 5 जनवरी सोमवार को सतसंग गंगा मानस परिवार ने अपनी भावविभोर प्रस्तुति दी। कडक़ड़ाती ठंड के बावजूद सैकड़ों श्रद्धालु देर रात तक कार्यक्रम में डटे रहे।

ग्राम तरेगांव में मां शाकम्भरी देवी मंदिर की स्थापना ग्रामवासियों द्वारा की गई है। मंदिर निर्माण के बाद से लगातार तीन दिवसीय शाकम्भरी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।

आयोजन समिति में अध्यक्ष बाबूराम पटेल, उपाध्यक्ष राजाराम पटेल, सचिव उत्तरा पटेल, कोषाध्यक्ष सुहेल पटेल, सलाहकार लालूराम पटेल एवं संयोजक सतऊ पटेल की सक्रिय भूमिका रही। वहीं प्रमुख संरक्षक एवं मार्गदर्शक के रूप में पूर्व सरपंच अमर सिंह वर्मा का विशेष योगदान रहा। महोत्सव के दौरान 24 घंटे प्रवचन, भजन संध्या एवं मेले का आयोजन हुआ। आसपास के अनेक गांवों से श्रद्धालुओं के साथ दुकानदार भी पहुंचे। बच्चों, महिलाओं एवं बुजुर्गों ने झूले, दुकानों और मेले का आनंद लिया। इस प्रकार मां शाकम्भरी महोत्सव गांव की धार्मिक, सांस्कृतिक पहचान बनकर श्रद्धा और सामाजिक एकता का संदेश देता रहा।—-


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