अंतरराष्ट्रीय
कोरोना से मचे कोहराम के बीच भी साइबर क्रिमिनल बाज नहीं आ रहे. डार्क नेट पर बीते दिनों लगातार कोरोना की दवा के नाम से नकली उत्पाद और पीपीई किट जैसी चीजों की बिक्री की रिपोर्ट आई. यहां तक कि वैक्सीन लगाने के नकली सर्टिफिकेट तक बिक रहे हैं, जो ऐसे लोगों के लिए जो किसी वजह से वैक्सीन नहीं लगवाना चाहते. इस बढ़े हुए साइबर क्राइम की वजह इंटरनेट की उपलब्धता बताई जा रही है. वहीं उत्तरी यूरोप के देश एस्टोनिया में मुफ्त इंटरनेट होने के बाद भी साइबर अपराध नहीं के बराबर हैं.
फ्री नहीं, और स्पीड में भी पीछे
साल 2019 में मोबाइल एनालिटिक्स कंपनी ओपनसिग्नल ने दुनियाभर में इंटरनेट की स्पीड जांची. इसमें पाया गया कि भारत में इंटरनेट भले ही सस्ती दरों पर उपलब्ध है लेकिन स्पीड में ये काफी पीछे है. भारत का नाम टॉप 10 की लिस्ट में भी कहीं नहीं. दूसरी ओर इंटरनेट प्लान कम कीमत पर उपलब्ध होने के मामले में भी भारत सबसे आगे नहीं. वहीं एस्टोनिया न केवल स्पीड में आगे है, बल्कि यहां पूरे देश में निःशुल्क इंटरनेट उपलब्ध है.
यहां हर सुविधा ऑनलाइन है
एस्टोनिया के नागरिक टैक्स रिटर्न भरने से लेकर कार पार्किंग की पेमेंट और डॉग बोर्डिंग का शुल्क भी ऑनलाइन देते हैं. अमेरिका की एक गैर सरकारी संस्था Freedom House की मानें तो ये पूरी दुनिया में फ्री इंटरनेट एक्सेस का मॉडल देश है. इंटरनेट के अलावा कई और बातें भी हैं जो इस देश को खास बनाती हैं.
रूस से अलग होने पर बदली व्यवस्था
यूरोप के उत्तर-पूर्व में बाल्टिक सागर के पूर्वी तट पर बसा ये देश पहले सोवियत संघ का हिस्सा हुआ करता था. साल 1991 में ये रूस से अलग हुआ. इसके बाद से यहां की गिरी हुई इकनॉमी में तेजी से सुधार आया. सबसे पहले एस्टोनियन सरकार ने अपने नागरिकों के लिए फ्लैट इनकम टैक्स की व्यवस्था लागू की, यानी यहां हरेक नागरिक को समान टैक्स भरना होता है. इसके साथ ही नागरिकों को इंटरनेट से जोड़कर अर्थव्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए एस्टोनिया में 1996 में देशव्यापी कार्यक्रम शुरू हुआ और आज ये पूरी तरह डिजिटल देश हो चुका है.
आर्थिक विकास काफी तेजी से हुआ
यूरोपीय यूनियन और नाटो का सबसे छोटा सदस्य देश माने जाने वाले एस्टोनिया की मुद्रा यूरो है. रूस से अलग होने के बाद यहां काफी तेजी से आर्थिक सुधार हुए और आज इस देश को यूरोपियन यूनियन के उन देशों में गिना जाता है जहां आर्थिक विकास की दर सबसे ज्यादा है.
कड़ी है निगरानी
पूरे देश में हर तरफ फ्री wifi होने के बावजूद यहां साइबर क्राइम नहीं के बराबर है. इसकी वजह ये भी मानी जाती है कि एस्टोनियन सरकार समय-समय पर नेट के सही इस्तेमाल पर कैंपेन चलाती रहती है. वैसे यहां इंटरनेट तो फ्री है लेकिन कई चीजों के एक्सेस पर रेस्ट्रिक्शन है. जैसे गैंबलिंग एक्ट के तहत किसी भी घरेलू और फॉरेन गैंबलिंग साइट को स्पेशल लाइसेंस की जरूरत होती है. लाइसेंस न होने पर वे बंद कर दिए जाते हैं. मार्च 2020 तक Estonian Tax and Customs Board ने ऐसी 1200 वेबसाइट्स छांटी, जिन्हें बंद करने की जरूरत थी क्योंकि उनके पास लाइसेंस नहीं था.
एस्टोनिया में पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी मुफ्त है
पहली बार देश की राजधानी ताल्लिन के तत्कालीन मेयर एदगार साविस्सार ने साल 2013 में ये फैसला लिया था. इसके पीछे उनकी सोच थी कि चूंकि रूस का हिस्सा रहने के दौरान आपस में काफी मनमुटाव हो चुका था तो देश के लोगों को घुलने-मिलने का ज्यादा से ज्यादा मौका मिले. फ्री परिवहन के लिए पहले यहां जनमत संग्रह हुआ और भारी संख्या में समर्थन मिलने पर बस और ट्राम फ्री हो गए.
स्वच्छ हवा के मामले में भी बाजी मारता है
साफ हवा की बात करें तो भी एस्टोनिया का नाम ऊपर आता है. World Health Organisation के पिछले साल जारी आंकड़ों के अनुसार एस्टोनिया उन चुनिंदा देशों में आता है, जहां एयर क्वालिटी सबसे अच्छी है. इसके अलावा लिस्ट में फिनलैंड, स्वीडन, कनाडा, नॉर्वे और आइसलैंड का नाम शामिल है.


