अंतरराष्ट्रीय
-इकबाल अहमद
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते सीनेट के चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन के चुनाव से जुड़ी ख़बरें सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियों में रहीं.
पाकिस्तानी संसद के ऊपरी सदन सीनेट के चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन के लिए हुए चुनाव में सत्ताधारी पाकिस्तान तहरीक़-ए-इंसाफ़ के उम्मीदवार ने संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार को हरा दिया.
चेयरमैन के चुनाव में सरकार के उम्मीदवार सादिक़ संजरानी को 48 और विपक्षी उम्मीदवार पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी को 42 वोट मिले. सीनेट में कुल 100 सदस्य होते हैं लेकिन 98 सदस्यों ने वोटिंग में हिस्सा लिया था.
बुधवार (तीन मार्च) को हुए सीनेट चुनाव में पाकिस्तान की प्रतिष्ठित इस्लामाबाद सीट से विपक्ष के साझा उम्मीदवार यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने सरकार के उम्मीदवार मौजूदा वित्त मंत्री हफ़ीज़ शेख़ को हरा दिया था.
गिलानी की शानदार जीत के बाद विपक्ष ने सीनेट के चेयरमैन के लिए उन्हें अपना संयुक्त उम्मीदवार बना दिया लेकिन इस बार गिलानी चुनाव हार गए.
अख़बार दुनिया के अनुसार चेयरमैन के चुनाव में प्रीज़ाइडिंग अधिकारी मुज़फ़्फ़र हुसैन शाह ने गिलानी के आठ वोटों को अयोग्य घोषित कर दिया.
मुज़फ़्फ़र हुसैन शाह के अनुसार सात सीनेटरों ने यूसुफ़ रज़ा गिलानी के नाम के ऊपर मुहर लगाई जबकि उन्हें ख़ाने के अंदर मुहर लगानी थी जबकि एक सीनेटर ने दोनों उम्मीदवारों के नाम पर मुहर लगा दी थी.
मुज़फ़्फ़र हुसैन शाह के इस फ़ैसले ने पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिति में एक नए विवाद को जन्म दे दिया है और सरकार और विपक्ष एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार 11 विपक्षी पार्टियों के समूह पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) ने कहा है कि, ''हमारी जीत छीन ली गई है, हम अदालत जाएंगे.''
दूसरी तरफ़ सरकार का कहना है कि इस चुनाव में हार के बाद पीडीएम का अंतिम संस्कार हो गया है.
सीनेट के नवनिर्वाचित चेयरमैन सादिक़ संजरानी ने कहा कि विपक्ष को फ़ैसला स्वीकार करना होगा, जो हुआ सबके सामने हुआ है.
अख़बार नवा-ए-वक़्त ने लिखा है कि सरकार ने मैदान मार लिया है और विपक्ष ने जीती हुई बाज़ी गंवा दी.
लेकिन विपक्ष ने इसे अपनी जीत क़रार दिया है.

अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने कहा कि "सीनेट चेयरमैन के चुनाव चोरी से जीते गए, हम अदालत में इसको चुनौती देंगे. प्रिज़ाइडिंग ऑफ़िसर सरकार के सहयोगी हैं जिन्होंने पक्षपातपूर्ण फ़ैसला किया."
बिलावल ने कहा कि सरकार की यह जीत वक़्ती है और पीपीपी ने हालात से डर कर हौसला नहीं हारा है.
यूसुफ़ रज़ा गिलानी के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में बिलावल ने कहा, "मैंने मरियम नवाज़ से संपर्क किया है. आसिफ़ ज़रदारी और मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने भी बातचीत की है. हम इस फ़ैसले को अदालत मे चुनौती देंगे और इस नाइंसाफ़ी को दूर करने के लिए हर लोकतांत्रिक फ़ोरम पर जाएंगे. हमारा मानना है कि हम यह चुनाव जीत चुके हैं."
बिलावल भुट्टो ने कहा कि सीनेट के चेयरमैन के चुनाव में एक दाग़ आ चुका है इसलिए सादिक़ संजरानी को अब ख़ुद ही इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.
यह पूछे जाने पर कि क्या विपक्ष सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी, बिलावल का कहना था कि इस पर बातचीत चल रही है लेकिन उनका मानना है कि विपक्ष को अदालत जाना चाहिए.
गिलानी के वोटों को अयोग्य ठहराने के अलावा वोटिंग के दौरान ख़ुफ़िया कैमरों के लगे होने की बात सामने आने के बाद विपक्ष ने एक बार फिर सरकार पर निशाना साधा.
विपक्ष के सदन में हंगामे के बाद प्रीज़ाइडिंग अधिकार मुज़फ़्फ़र हुसैन शाह ने सरकार और विपक्ष के तीन-तीन सदस्यों पर आधारित एक जाँच कमेटी का गठन कर दिया.
अख़बार दुनिया के अनुसार पीडीएम की एक अहम पार्टी मुस्लिम लीग (नवाज़) की उपाध्यक्ष मरियम नवाज़ ने सरकार पर हमले करते हुए कहा कि संविधान में ख़ुफ़िया बैलट का तो ज़िक्र है लेकिन ख़ुफ़िया कैमरे का कहीं ज़िक्र नहीं है.
अख़बार जंग के अनुसार केंद्रीय गृहमंत्री शेख़ रशीद ने कहा है कि कैमरे लगे हों या ना हों, नतीजे यही आने थे.
शेख़ रशीद का कहना था, "जिसे बिकना हो वो 14 पाबंदियों में भी बिक जाता है, जिसे वोट नहीं देना होता है वो नहीं देता. यहां तो लोग पर शपथ लेकर अंदर जाकर किसी और को वोट दे देते हैं. जो यूसुफ़ रज़ा गिलानी के साथ हुआ ऐसा ही हफ़ीज़ शेख़ के साथ हुआ था. अब सियासत में ठहराओ आ जाना चाहिए."
पीडीएम के प्रमुख मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने कहा है कि सीनेट के चुनावी नतीजे का असर पीडीएम की तहरीक पर नहीं पड़ेगा.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने कहा कि 2018 के बाद पाकिस्तान के सभी चुनाव शक के घेरे में हैं. उन्होंने कहा कि सीनेट चेयरमैन के चुनाव को चुनौती देने के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाना चाहिए लेकिन वो ज़ाती तौर पर मानते हैं कि इस गतिरोध का एकमात्र हल यही है कि हमें जनता के पास जाना चाहिए. (bbc.com)


