अंतरराष्ट्रीय
ब्रिटेन के वरिष्ठ डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि बच्चों पर सोशल मीडिया का प्रभाव इतना गंभीर है कि इसे धूम्रपान जैसी बड़ी स्वास्थ्य चुनौती के बराबर माना जाना चाहिए. एक प्रमुख मेडिकल संस्था, एकेडमी ऑफ मेडिकल रॉयल कॉलेजेस, ने सरकार को दी गई अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम और बिना नियंत्रण के टेक्नोलॉजी का उपयोग बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल रहा है. डॉक्टरों का कहना है कि यह मुद्दा हाल के वर्षों में चिकित्सा समुदाय को सबसे ज्यादा एकजुट करने वाले विषयों में से एक बन गया है.
रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे किए गए डॉक्टरों में से आधे से अधिक हर सप्ताह कम से कम एक ऐसा मामला देख रहे हैं जिसमें बच्चों को तकनीक के कारण नुकसान हुआ हो, जबकि एक तिहाई डॉक्टरों ने सप्ताह में कई बार ऐसे मामलों की पुष्टि की. इन नुकसान में शारीरिक चोटें भी शामिल हैं, जैसे कि खतरनाक ऑनलाइन कंटेंट की नकल करने से लगी चोटें, और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी, जैसे हिंसक या परेशान करने वाले कंटेंट के कारण तनाव और आघात.
ब्रिटेन सरकार अब बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाने पर विचार कर रही है, जिसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध, ऐप इस्तेमाल की समय सीमा और कुछ फीचर्स पर रोक शामिल हैं. हालांकि, विशेषज्ञों के बीच इस तरह के पूर्ण प्रतिबंध की प्रभावशीलता पर मतभेद हैं, और कई युवा भी इन प्रतिबंधों का विरोध कर रहे हैं. (dw.com/hi)


