अंतरराष्ट्रीय
इस्लामाबाद, 25 मई । पाकिस्तान की महत्वाकांक्षी सीपीईसी परियोजना वो उड़ान नहीं भर पाई है जिसकी उसे उम्मीद थी। 'बेल्ट एंड रोड' पहल (बीआरआई) एक बहु-अरब डॉलर परियोजना चीनी शिनजियांग प्रांत को पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित ग्वादर बंदरगाह से जोड़ती है। इसे लेकर पाकिस्तान ने बड़े दावे किए थे। बलूचों ने इसका भारी विरोध किया। नतीजतन इस इलाके में चीनी-पाकिस्तानी इंजीनियर्स और कर्मचारी हमेशा निशाने पर रहे। 2021 और 2024 में दो बड़े हमले हुए जिसमें कई अफसर और कर्मचारी मारे गए। इसके बाद कई निवेशकों ने अपने हाथ पीछे खींच लिए जिससे पाकिस्तान को काफी नुकसान हुआ। यही वजह है कि सरकार ने देशभर में प्रमुख जल क्षेत्र की अवसंरचना परियोजनाओं और उनसे जुड़े कर्मचारियों, विशेष रूप से चीन से आने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए एक नई “वापडा सिक्योरिटी फोर्स” बनाने का निर्णय लिया है। एक बिल तैयार कर संसद को भेज दिया है। जिसमें अधिकारियों, कर्मचारियों को मुकदमे से छूट का प्रावधान भी है।
यह बल “वापडा सिक्योरिटी फोर्स एक्ट, 2026” के माध्यम से बनाया जा रहा है, जिसे पहले ही संसद को भेजा जा चुका है। सरकारी फरमान के मुताबिक, “वापडा सिक्योरिटी फोर्स का गठन जल एवं विद्युत विकास प्राधिकरण (वापडा) द्वारा प्रबंधित महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है।” अलग सुरक्षा बल बनाने का निर्णय दासू हाइड्रोपावर परियोजना (सीपीईसी का प्रमुख रणनीतिक हिस्सा) पर हुए दो आतंकवादी हमलों के बाद लिया गया। नवंबर 2021 और मार्च 2024 में 6 अरब डॉलर से अधिक लागत वाली इस परियोजना पर हुए हमलों में कई चीनी और पाकिस्तानी इंजीनियरों और कर्मचारियों की मौत हो गई थी। शुरुआत में, सीपीईसी (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) से संबंधित सुरक्षा व्यवस्था को दासू परियोजना तक बढ़ाया गया था। एक अधिकारी ने प्रमुख पाकिस्तानी दैनिक डॉन से बताया कि पाकिस्तान सेना की दो विशेष सुरक्षा डिवीजन (उत्तर और दक्षिण) बलूचिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान तक के मार्ग पर सीपीईसी परियोजनाओं को सुरक्षा प्रदान करती थीं, लेकिन वापडा परियोजनाएं इस सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में नहीं आती थीं। उन्होंने कहा कि इसलिए एक विशेष व्यवस्था की आवश्यकता थी और वापडा की पूरी सुरक्षा प्रणाली को नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। अधिकारी ने याद दिलाया कि दासू परियोजना के कर्मचारियों पर हुए हमले और उसमें हुई जनहानि के कारण चीनी पक्ष ने परियोजना का काम एक वर्ष से अधिक समय तक रोक दिया था। बाद में उच्च स्तरीय सरकारी बातचीत और मुआवजे के भुगतान के बाद काम फिर से शुरू हुआ, हालांकि इससे लागत बढ़ गई और परियोजना में देरी हुई। बाद में, चीनी कर्मचारियों से जुड़ी अन्य परियोजनाओं तक भी सीपीईसी जैसी सुरक्षा व्यवस्था का विस्तार किया गया।
इसमें पाकिस्तान सेना द्वारा बाहरी सुरक्षा घेरा प्रदान किया गया, जबकि वापडा की आंतरिक सुरक्षा, स्थानीय पुलिस तथा अन्य प्रांतों में रेंजर्स या फ्रंटियर कॉन्स्टेबुलरी भी सुरक्षा में शामिल रहे। चीनी पक्ष के साथ परामर्श के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने निर्देश दिया कि सीपीईसी स्तर की सुरक्षा सभी परियोजनाओं, विशेष रूप से चीनी नागरिकों से संबंधित और राष्ट्रीय महत्व की अन्य जल क्षेत्र परियोजनाओं को उपलब्ध कराई जाए। वापडा सिक्योरिटी फोर्स का नेतृत्व एक महानिदेशक (डायरेक्टर जनरल) करेंगे, जो संभवतः सशस्त्र बलों से होंगे। यह बल देश की आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण अवसंरचना, जैसे बांधों और बिजलीघरों, की सुरक्षा का जिम्मा संभालेगा। बल प्रतिष्ठानों, बांधों, बिजलीघरों, मशीनरी, उपकरणों, कार्यालयों, कर्मचारियों और उनके आवासों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा तथा उनसे संबंधित अपराधों को रोकने का काम करेगा। वापडा सिक्योरिटी फोर्स की सर्वोच्च निगरानी संघीय सरकार के पास होगी, जबकि इसका नियंत्रण वापडा के अधीन रहेगा। सरकार के आदेश पर यह बल अन्य कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय और सहयोग भी करेगा, ताकि आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के बाद अधिसूचित क्षेत्रों को अतिक्रमण और अवैध प्रवेश से सुरक्षित रखा जा सके। इस बल की संख्या समय-समय पर सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुसार तय की जाएगी। मसौदा कानून में यह भी कहा गया है कि “औद्योगिक संबंध अधिनियम, 2012” और “औद्योगिक एवं वाणिज्यिक रोजगार (स्थायी आदेश) अध्यादेश, 1968” वापडा सिक्योरिटी फोर्स के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी पर लागू नहीं होंगे। चिंताजनक बात ये है कि मसौदा कानून में स्पष्ट कहा गया है कि सरकार, वापडा, महानिदेशक, फोर्स के किसी अधिकारी या कर्मचारी, या कानून के तहत अधिकारों का प्रयोग करने वालों के खिलाफ कोई मुकदमा, अभियोजन या अन्य कानूनी कार्रवाई नहीं करेगी। -- (आईएएनएस)


