अंतरराष्ट्रीय
रूस के निजनी नोवगोरोद स्थित लोबाचेवस्की स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई रासायनिक तकनीक विकसित की है, जो कैंसर की दवाओं के असर को कई गुना बढ़ा सकती है. इस शोध के जरिए कैंसर के पुराने इलाज को और अधिक प्रभावी बनाने की उम्मीद जगी है.
इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बहुमुखी प्रतिभा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि कई रासायनिक समूहों को सीधे मौजूदा दवाओं में जोड़ा जा सकता है. इसका मतलब है कि पहले से स्वीकृत और इस्तेमाल की जा रही कैंसर की दवाओं को पूरी तरह से नया पदार्थ बनाए बिना ही अपग्रेड किया जा सकेगा. इससे नई दवाओं के विकास में लगने वाला समय और खर्च दोनों बचेंगे.
यह विधि न केवल प्रभावी है बल्कि औद्योगिक उत्पादन के लिए भी बहुत उपयुक्त है. शोध के अनुसार, इस रासायनिक प्रक्रिया में 90 फीसदी तक उत्पादन मिलता है और अंतिम यौगिक की शुद्धता 95 फीसदी से अधिक होती है. इतनी उच्च शुद्धता और दक्षता के कारण इसे बड़े पैमाने पर दवाओं के निर्माण के लिए आदर्श माना जा रहा है. शोधकर्ता अब इस तकनीक का उपयोग नाइट्रोजन युक्त नए जटिल यौगिक बनाने के लिए भी कर रहे हैं, जो भविष्य में और भी सटीक कैंसर उपचार का आधार बन सकते हैं. (dw.com/hi)


