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ट्रंप ने ईरान और अफ़ग़ानिस्तान समेत इन 12 देशों पर प्रतिबंध क्यों लगाए?
06-Jun-2025 9:15 AM
ट्रंप ने ईरान और अफ़ग़ानिस्तान समेत इन 12 देशों पर प्रतिबंध क्यों लगाए?

-जेम्स फ़िट्ज़गेराल्ड

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अफ़्रीका और मध्य पूर्व के कुछ देशों से अमेरिका आने वाले लोगों पर प्रतिबंध लगाया है.

12 देशों के यात्रियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, जो अगले हफ़्ते के सोमवार से लागू होगा. वहीं सात अन्य देश के लोगों को आंशिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है.

राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला बताया है. उन्होंने हाल में कोलोराडो में यहूदी समुदाय के सदस्यों पर हुए हमले का हवाला दिया, जिसे कथित तौर पर मिस्र के एक नागरिक ने अंजाम दिया था. हालांकि प्रतिबंधित मुल्कों की सूची में मिस्र नहीं है.

प्रतिबंध लगाने के जो अन्य कारण बताए गए हैं उनमें इन देशों के लोगों का कथित तौर पर अमेरिकी वीज़ा नियमों का उल्लंघन करना शामिल है.

अफ़ग़ानिस्तान
ट्रंप ने अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ कई आरोप लगाए हैं. व्हाइट हाउस द्वारा जारी किए बयान में बताया गया है कि अफ़ग़ानिस्तान को नियंत्रित करने वाला तालिबान एक वैश्विक आतंकवादी संगठन है.

यह कदम ट्रंप प्रशासन की ओर से अमेरिका में रहने वाले अफ़ग़ान नागरिकों के लिए अस्थायी संरक्षित स्थिति (टीपीएस) को ख़त्म करने की घोषणा के कुछ ही सप्ताह बाद उठाया गया है. उस वक्त ट्रंप प्रशासन की तरफ़ से यह संकेत दिया गया था कि अफ़ग़ानिस्तान में स्थिति में सुधार हुआ है.

ट्रंप ने अफ़ग़ानिस्तान पर पासपोर्ट या नागरिकता संबंधी दस्तावेज़ जारी करने के लिए "सक्षम या सहयोगी" सेंट्रल अथॉरिटी की कमी का भी आरोप लगाया है.

ट्रंप की सूची में शामिल अन्य देशों की तरह, अफ़ग़ान नागरिकों के वीज़ा की अवधि से ज़्यादा समय तक अमेरिका में रहने का मुद्दा भी उठाया गया है.

ईरान
ट्रंप की घोषणा में ईरान को आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश बताया गया है. इससे पहले भी ट्रंप ईरान पर इस तरह का आरोप लगा चुके हैं, जिसे ईरान ने ख़ारिज किया है.

अमेरिका ने पहले भी मध्य पूर्व के क्षेत्र में सक्रिय हमास और हिज़्बुल्लाह जैसे प्रॉक्सी समूहों को कथित रूप से बढ़ावा का आरोप ईरान पर लगाया है इसके लिए उसकी निंदा की है.

ट्रंप की नई घोषणा में कहा गया है कि यह देश "विश्वभर में आतंकवाद का प्रमुख स्रोत है" और सुरक्षा जोख़िमों के मुद्दों पर अमेरिका के साथ सहयोग नहीं करता. साथ ही ट्रंप ने ईरान पर "अमेरिका से निकाले गए अपने नागरिकों को स्वीकार न करने" का आरोप भी लगाया है.

ट्रंप का ताज़ा क़दम ईरान की परमाणु हथियार निर्माण क्षमताओं पर एक नए समझौते को लेकर दोनों पक्षों के बीच चल रहे कूटनीतिक विवाद के बीच उठाया गया है.

सोमालिया के मामले में भी इसी तरह के कारण बताए गए हैं. इस अफ़्रीकी देश को ट्रंप ने "आतंकवादियों का सुरक्षित ठिकाना" करार दिया है. ईरान की तरह सोमालिया पर भी अमेरिका से निकाले गए अपने नागरिकों को स्वीकार न करने का आरोप है.

हालांकि, सोमालिया के बारे में ट्रंप ने एक और बात कही है. उन्होंने कहा है, "सोमालिया अन्य देशों से इस मामले में अलग है कि यहां की सरकार के पास अपने क्षेत्र पर कमान और नियंत्रण का अभाव है, जो कई मामलों में उसकी राष्ट्रीय क्षमताओं को बहुत सीमित करता है."

सोमालिया की सरकार को सशस्त्र इस्लामी गुटों से बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. सोमालिया ने ट्रंप की तरफ़ से उठाई गई चिंताओं को दूर करने के लिए "बातचीत में शामिल होने" का वादा किया है.

वहीं उत्तरी अफ़्रीका में मौजूद लीबिया को "ऐतिहासिक तौर पर आतंकवाद की उपस्थिति" के लिए प्रतिबंधित देशों की लिस्ट में शामिल किया गया है, इसे अमेरिकियों के लिए सुरक्षा ख़तरा बताया गया है.

लीबिया और सोमालिया दोनों के बारे में व्हाइट हाउस के बयान में कहा गया है कि वहां पासपोर्ट जारी करने के लिए किसी सक्षम या सहयोगी सेंट्रल एजेंसी का अभाव है.

हैती
हैती के बारे में दस्तावेज़ में कहा गया है कि "बाइडन प्रशासन के दौरान हैती के लाखों नागरिक अवैध तरीके़ से अमेरिका में घुस आए."

डोनाल्ड ट्रंप ने इसके कारण होने वाले जोखिमों की ओर इशारा किया है, जिसमें "आपराधिक नेटवर्क" बनाना और वीज़ा की अवधि से अधिक समय तक रहने की ऊंची दर शामिल है.

अमेरिकी जनगणना ब्यूरो के आंकड़ों से पता चलता है कि फ़रवरी 2024 में हैती के आठ लाख 52 हज़ार से अधिक लोग अमेरिका में रह रहे थे, हालांकि यह नहीं बताया गया कि ये प्रवासी अमेरिका में कब पहुंचे.

इनमें से कई लोग 2010 में आए विनाशकारी भूकंप के बाद या देश में फैली हिंसा से भागकर आए थे. अमेरिकी राष्ट्रपति ने क़ानून प्रवर्तन सहित अन्य मामलों के लिए हैती में सेंट्रल अथॉरिटी की कमी की ओर भी इशारा किया.

ट्रंप प्रशासन ने इन देशों के लोगों पर तय वीज़ा अवधि से अधिक समय तक अमेरिका में रहने का आरोप लगाया है.

होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (डीएचएस) "ओवरस्टे" को ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित करता है जो अमेरिका में आने की अपनी तय अवधि से अधिक समय तक रहता है और उसके पास किसी तय समय से ज़्यादा वक्त तक रहने का कोई दस्तावेज़ नहीं होता.

मध्य अफ़्रीकी देश चाड पर "अमेरिकी आप्रवासन क़ानूनों के प्रति घोर उपेक्षा" दिखाने का आरोप लगाया गया है.

व्हाइट हाउस की तरफ से जारी घोषणा में डीएचएस रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि 2023 में व्यापार या पर्यटक वीज़ा पर चाड के नागरिकों की ओवरस्टे दर 49.54 फ़ीसद है.

वहीं कांगो रिपब्लिक और इक्वेटोरियल गिनी से आने वाले लोगों के मामले में लगभग ये दर 29.63 प्रतिशत और 21.98 प्रतिशत हैं. लेकिन ये दरें लाओस से कम हैं, जिस पर तुलनात्मक रूप से कम प्रतिबंध लगाए गए हैं.

म्यांमार
म्यांमार (पूर्व में बर्मा) के लोगों पर भी वीज़ा अवधि से अधिक समय तक अमेरिका में रहने का आरोप लगाया गया है और कहा गया है कि अमेरिका में रहने वाले म्यांमार के नागरिकों में ये दर अधिक है.

वहीं इस सूची में शामिल ईरान सहित अन्य देशों की तरह इस देश पर भी देश से निर्वासित नागरिकों को स्वीकार करने में अमेरिका के साथ सहयोग नहीं करने का आरोप है.

ट्रंप प्रशासन ने इन देशों पर आरोप लगाया है कि पासपोर्ट और नागरिकता संबंधी दस्तावेज़ जारी करने में इन देशों की भूमिका संदिग्ध है.

इरीट्रिया और सूडान के लोगों पर तय वीज़ा अवधि से अधिक समय तक अमेरिका में रहने का आरोप है. इरीट्रिया पर अपने नागरिकों के आपराधिक रिकॉर्ड अमेरिका के साथ साझा करने में विफल रहने और निर्वासित नागरिकों को स्वीकार करने से इनकार करने का भी आरोप है.

व्हाइट हाउस की तरफ से जारी घोषणा में कहा गया है कि सोमालिया की तरह यमन का भी अपनी ज़मीन पर अधिक नियंत्रण नहीं है.

ट्रंप की घोषणा इस बात पर भी ज़ोर देती है कि यह अमेरिकी सेना के सक्रिय अभियानों की जगह है. अमेरिका यहां मौजूद हूती विद्रोहियों से लड़ रहा है, जिन्होंने यहां जारी गृहयुद्ध के दौरान देश के उत्तरी और पश्चिमी हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया है.

आंशिक प्रतिबंध
व्हाइट हाउस की तरफ से जारी घोषणा के अनुसार सात अन्य देशों के लोगों को आंशिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा.

वेनेज़ुएला पर पासपोर्ट और इसी तरह के दस्तावेज़ जारी करने के लिए "सक्षम या सहयोगी सेंट्रल अथॉरिटी" की कमी का आरोप लगाया गया है. साथ ही वीज़ा अवधि से अधिक समय तक रहने और निर्वासितों को स्वीकार करने से इनकार करने के आरोप भी लगाए गए हैं.

जवाब में, दक्षिण अमेरिकी देश वेनेज़ुएला ने ट्रंप प्रशासन को "वर्चस्ववादी" बताया है, और कहा है वो (ट्रंप) ये सोचते हैं कि वो दुनिया के मालिक हैं.

क्यूबा को "आतंकवाद का एक और प्रायोजक" देश बताया गया है. अमेरिका ने 2021 में क्यूबा के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया था, जिसकी उस वक्त क्यूबा ने निंदा की थी.

साथ ही क्यूबा पर निर्वासितों को स्वीकार करने से कथित इनकार और यहां के लोगों पर वीज़ा अवधि से अधिक समय तक अमेरिका में रहने का भी आरोप लगाया गया है.

वहीं ट्रंप की घोषणा के अनुसार बुरुंडी, लाओस, सिएरा लियोन, टोगो और तुर्कमेनिस्तान के मामलों में वीज़ा अवधि से अधिक समय तक अमेरिका में रहना बड़ा मुद्दा है.(bbc.com/hindi)


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