गरियाबंद
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
नवापारा-राजिम, 4 जून। ग्राम पंचायत तोरला, विकासखंड अभनपुर में शासकीय चराई भूमि को कथित रूप से निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज किए जाने का मामला अब तूल पकडऩे लगा है।
ग्रामीणों ने इस पूरे प्रकरण को राजस्व नियमों के विपरीत बताते हुए कलेक्टर रायपुर से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पूर्व सरपंच शिवेंद्र तारक एवं केजू राम पटेल सहित अन्य लोगों ने की । ग्रामीणों द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार ग्राम पंचायत तोरला के अंतर्गत स्थित खसरा नंबर 1031, रकबा 1.93 हेक्टेयर (लगभग 4 एकड़ 82 डिसमिल) भूमि वर्ष 1999-2000 में शासकीय चराई भूमि के रूप में दर्ज थी। वर्ष 2004-2005 के राजस्व अभिलेखों में भी उक्त भूमि शासकीय चराई मद में दर्ज बताई गई है।
आरोप है कि वर्ष 2006 में तत्कालीन तहसील कार्यालय गोबरा-नवापारा में पदस्थ अधिकारियों के हस्ताक्षर से उक्त भूमि के लगभग 2 एकड़ 20 डिसमिल हिस्से का बंटवारा कर उसे कब किसी अन्य के नाम दर्ज कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि को निजी नाम पर दर्ज करना गंभीर अनियमितता और राजस्व नियमों का उल्लंघन है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि 17 वर्षों बाद पुन: रिकॉर्ड दुरुस्ती कर संबंधित नामों को डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से दर्ज किया गया, जिससे पूरे मामले को लेकर संदेह और बढ़ गया है।
मामले को लेकर पिछले दिनों ग्राम पंचायत तोरला में विशेष ग्राम सभा आयोजित की गई, जिसमें सरपंच की अध्यक्षता में बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित हुए। ग्राम सभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर उक्त भूमि को पुन: शासकीय चराई भूमि के रूप में दर्ज करने तथा पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की गई। ग्रामीणों ने कलेक्टर रायपुर, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अभनपुर, तहसीलदार गोबरा-नवापारा तथा थाना नवापारा को ज्ञापन सौंपकर संबंधित अधिकारियों और व्यक्तियों के विरुद्ध वैधानिक एवं प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की मांग की है। केजू राम पटेल व ग्रामीणों ने कहा कि चराई भूमि गांव की सार्वजनिक संपत्ति है और उसका संरक्षण आवश्यक है।
यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण आंदोलन करने को बाध्य होंगे।


