गरियाबंद
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजिम, 18 फरवरी। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार उत्तराखंड के उप कुलसचिव बलदाऊ प्रसाद देवांगन धर्मनगरी राजिम प्रवास पर पहुँचे।
इस अवसर पर उन्होंने वेद माता गायत्री,भगवान श्री राजीव लोचन, श्रीकुलेश्वर महादेव तथा राजिम भक्तिन माता मंदिर में दर्शन कर पूरे छत्तीसगढ़ सहित देशवासियों के सुख,शांति एवं समृद्धि की कामना की। छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान श्री देवांगन ने नवापारा नगर में अपने बचपन के मित्रों एवं समाजजनों रवि शंकर साहू,पं ब्रह्मदत्त शास्त्री,संतोष माखीजा हेमंत गोलछा एवं नजीर अली से आत्मीय भेंट मुलाकात की।
गरियाबंद जाते समय उन्होंने राजिम कुंभ मेला में विगत 5 वर्षों से राजिम भक्तिन माता भोग भंडारा के आयोजन कर रहे राजिम भक्तिन माता समिति के अध्यक्ष लाला साहू से सौजन्य भेंट की तथा समिति द्वारा किए जा रहे सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों की सराहना की। इस अवसर पर श्री देवांगन ने समिति के अध्यक्ष लाला साहू से कहा कि राजिम भक्तिन माता की भव्य प्रतिमा न केवल राजिम नगर,बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों में स्थापित होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हरिद्वार में साहू समाज की बड़ी संख्या निवास करती है और वे वहाँ भी राजिम भक्तिन माता की भव्य प्रतिमा स्थापना के लिए समाज को प्रेरित करने का प्रयास करेंगे। तथा छत्तीसगढ़ के पाठ्य पुस्तकों में राजिम भक्तिन माता की जीवन गाथा को शामिल करने के दिशा में कार्य करने की सलाह दिए। उन्होंने जानकारी दी कि देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार उत्तराखंड भारतीय संस्कृति,सनातन धर्म और मानव मूल्यों के संवर्धन के लिए सतत कार्य कर रहा है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऋषि-मुनियों,साधु-संतों, महापुरुषों और देशभक्तों के विचारों को व्यक्ति,परिवार और समाज के जीवन में पुनर्स्थापित करना है। इस दिशा में शांतिकुंज हरिद्वार निरंतर संकल्पित प्रयास कर रहा है तथा विभिन्न सत्रों के माध्यम से जनसामान्य को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर से परिचित कराया जा रहा है। श्री देवांगन ने बताया कि 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद छत्तीसगढ़ के विद्यार्थी भी देव संस्कृति विश्वविद्यालय में प्रवेश ले सकते हैं।विश्वविद्यालय में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की पढ़ाई कराई जाती है। जैसे इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी बैचलर ऑफ कंप्यूटर टूरिज्म एंड मैनेजमेंट पत्रकारिता एवं जनसंचार हिंदी अंग्रेजी संस्कृत एवं इतिहास के साथ-साथ 3स्र एनीमेशन में स्नातक तथा स्नातकोत्तर में हिंदी संस्कृत अंग्रेजी एवं गणित सहित इतिहास, दर्शनशास्त्र, मानव चेतना, योग विज्ञान, गायन-संगीत, संस्कृति विज्ञान जैसे विषयों की पढ़ाई होती है तथा भारतीय संस्कृति की शिक्षा दी जाती है। साथ ही विद्यार्थियों को आर्ट ऑफ लिविंग अर्थात जीवन जीने की कला भी सिखाई जाती है।
उन्होंने छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय से जोडऩे के लिए समाज में जागरूकता लाने की आवश्यकता पर बल दिया।चर्चा के उपरांत राजिम भक्तिन माता समिति की ओर से श्री देवांगन को राजिम भक्तिन माता की जीवनगाथा से अवगत कराया गया तथा उन्हें अरपा छत्तीसगढ़ विशेषांक भेंट किया गया, जिसमें राजिम भक्तिन माता के जीवन गाथा की विस्तृत जानकारी है। इस अवसर पर राजिम भक्तिन माता चौक में उनका स्वागत एवं अभिनंदन भी किया गया।उल्लेखनीय है कि देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उप कुलसचिव बलदाऊ प्रसाद देवांगन मूलत: नया पारा, राजिम के निवासी हैं और छत्तीसगढ़ की संस्कृति से भली-भांति परिचित हैं। वे सरल, सहज स्वभाव से लोगों से संवाद कर देव संस्कृति विश्वविद्यालय की जानकारी दे रहे हैं तथा विद्यार्थियों को वहाँ प्रवेश के लिए प्रेरित कर रहे हैं। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उप कुलसचिव से भेंट मुलाकात के समय वेदमाता गायत्री मंदिर के सदस्य अमृतलाल साहू समिति के संगठन मंत्री डॉ ओंकार साहू एवं समाजसेवी रवि शंकर साहू,अनसूया साहू वात्सला देवांगन विशेष रूप से उपस्थित थीं।


