गरियाबंद
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजिम, 16 फरवरी। राजिम के त्रिवेणी संगम और नवीन मेला मैदान में आयोजित राजिम कुंभ कल्प में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर अभूतपूर्व भीड़ उमड़ पड़ी। अंतिम दिवस और रविवार होने के कारण श्रद्धालुओं का सैलाब चरम पर पहुंच गया। पिछले तीन दिनों से लगातार बढ़ती भीड़ ने इस बार कई वर्षों का इतिहास पीछे छोड़ दिया। मेला क्षेत्र में कदम रखने की जगह तक मुश्किल हो गई।
शनिवार रात से ही त्रिवेणी संगम में स्नान के लिए श्रद्धालुओं की निरंतर आवाजाही बनी रही। गरियाबंद, रायपुर और धमतरी जिलों सहित प्रदेशभर से आए श्रद्धालुओं से नदी में बने अस्थायी मार्गों में भारी भीड़ रही। कई स्थानों पर भीड़ का दबाव इतना बढ़ा कि धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। पंचेश्वर मंदिर से लेकर लोमश ऋषि आश्रम तक तथा नवीन मेला मैदान चौबेबांधा क्षेत्र तक श्रद्धालुओं की कतार में नजर आईं।
मीना बाजार, क्राफ्ट बाजार, झूले, मौत का कुआं, जलपरी, वैष्णव देवी धाम, संभागीय सरस मेला और सांस्कृतिक मंच की दर्शक दीर्घा भी पूरी तरह भरी रही। बच्चों और परिवारों की चहल-पहल से पूरा मेला क्षेत्र जीवंत बना रहा। मेला घूमने आए लोगों ने जमकर खरीदारी भी की, जिससे व्यापारियों के चेहरे भी खिले दिखाई दिए।
राजिम कुंभ की प्रसिद्धि अब देश की सीमाओं से दूर पहुंच चुकी है। अमेरिका के पर्यटक जॉनसन और मीरा ने बताया कि भारत भ्रमण के दौरान वे पहली बार छत्तीसगढ़ आए हैं और राजिम कुंभ ने उन्हें अत्यंत प्रभावित किया।
उन्होंने इसे छोटा लेकिन अत्यंत सुंदर और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध मेला बताया। इटली और नाइजिरियन सहित अन्य देशों के पर्यटक भी पिछले कई दिनों से मेले की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आभा में रमे नजर आए।
पूरे मेला परिसर में सुरक्षा के मद्देनजर लगभग 1500 जवान तैनात हैं, जिनमें सैकड़ों महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं। मेला क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों से सतत निगरानी की जा रही थी। बढ़ते यातायात दबाव के कारण चौड़ी सडक़ें भी संकरी पड़ती दिखाई दीं। महाशिवरात्रि पर उमड़ी यह ऐतिहासिक भीड़ राजिम कुंभ कल्प की बढ़ती लोकप्रियता और आस्था की गहराई का प्रमाण बन गई। भक्ति, संस्कृति और जनसहभागिता के संगम के साथ इस वर्ष का राजिम कुंभ कल्प यादगार समापन की ओर अग्रसर हुआ।


