गरियाबंद
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
छुरा, 10 फरवरी। आईएसबीएम विश्वविद्यालय में सोमवार को ‘AI & Innovation Sprints: Rapid Prototyping for Digital TransformationU’ विषय पर एक दिवसीय हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की पूजा एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर आईआईसी-आईएसबीएम विश्वविद्यालय के संयोजक टेकेश्वर कौशिक ने इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल की भूमिका, उद्देश्य तथा आईएसबीएम विश्वविद्यालय में संचालित नवाचार संबंधी गतिविधियों की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि आईआईसी का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में प्रारंभिक स्तर से ही नवाचार, अनुसंधान एवं उद्यमिता की भावना विकसित करना है।
स्वागत भाषण में डॉ. शुभाशीष बिस्वास, डीएसडब्ल्यू, आईएसबीएम विश्वविद्यालय द्वारा दिया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं नवाचार के माध्यम से डिजिटल समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने बताया कि वर्तमान डिजिटल युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नवाचार आधारित स्प्रिंट मॉडल किसी भी संस्था के विकास का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। इसके माध्यम से कम समय में प्रभावी, सटीक एवं उपयोगी डिजिटल समाधान विकसित किए जा सकते हैं।
तत्पश्चात प्रो. एन. के. स्वामी, आईआईसी अध्यक्ष, डीन एकेडमिक एवं आईक्यूएसी निदेशक ने ‘प्रोटोटाइप की अवधारणा’ पर विस्तृत व्याख्यान दिया। एआई आधारित प्रोटोटाइप के माध्यम से स्मार्ट एप्लिकेशन, चैटबॉट, डेटा एनालिटिक्स सिस्टम, ऑटोमेशन टूल्स एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए जा सकते हैं, जो शिक्षा, प्रशासन, उद्योग एवं समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उपयोगी सिद्ध होते हैं। यह भी बताया गया कि क्रड्डश्चद्बस्र क्कह्म्शह्लशह्ल4श्चद्बठ्ठद्द तकनीक द्वारा किसी भी डिजिटल उत्पाद या प्रणाली का प्रारंभिक मॉडल कम समय में तैयार किया जाता है, जिससे उसकी उपयोगिता, गुणवत्ता एवं व्यवहारिकता का मूल्यांकन किया जा सके। इससे समय, लागत एवं संसाधनों की बचत होती है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. उर्वशी शुक्ला, एसोसिएट प्रोफेसर, आईआईएमटी विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा द्वारा प्रतिभागियों को कार्यशील प्रोटोटाइप के डिजाइन एवं विकास का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने बताया कि इनोवेशन स्प्रिंट्स एक आधुनिक कार्यप्रणाली है, जिसमें टीमवर्क के माध्यम से समस्या की पहचान कर उसके लिए त्वरित समाधान तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया में डिजाइन, प्रोटोटाइप निर्माण, परीक्षण एवं सुधार के चरण शामिल होते हैं।कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि रैपिड प्रोटोटाइप तकनीक द्वारा किसी भी डिजिटल उत्पाद या प्रणाली का प्रारंभिक मॉडल कम समय में तैयार किया जाता है, जिससे उसकी उपयोगिता, गुणवत्ता एवं व्यवहारिकता का मूल्यांकन किया जा सके। इससे समय, लागत एवं संसाधनों की बचत होती है।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. सुनील कुमार साहू, सहायक प्राध्यापक एवं आईआईसी सदस्य द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रबंधन, आयोजक समिति, एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।यह कार्यक्रम छात्रों के नवाचार, तकनीकी दक्षता एवं डिजिटल परिवर्तन के क्षेत्र में आगे बढऩे के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं नवाचार के माध्यम से डिजिटल समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया एवं व्यावहारिक ज्ञान अर्जित किया।
इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) के अध्यक्ष एवं संयोजक का मार्गदर्शन एवं नेतृत्व अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। साथ ही कुलाधिपति एवं आईएसबीएम विश्वविद्यालय के समस्त प्रबंधन का विशेष सहयोग एवं संरक्षण प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त आईआईसी के सभी सदस्यों के सतत परिश्रम, समन्वय एवं टीमवर्क के कारण यह कार्यक्रम सुव्यवस्थित, गरिमामय एवं पूर्ण सफलता के साथ संपन्न हो सका।
इस कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु विश्वविद्यालय के कुलाधिपति, कुलपति, कुलसचिव एवं सभी अधिष्ठाताओं द्वारा अग्रिम रूप से शुभकामनाएँ प्रदान की गई हैं।


