गरियाबंद

छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा दिलाने प्रदेश के सभी सांसदों में एकजुटता की आवश्यकता- कवि संतोष सोनकर
30-Nov-2025 2:47 PM
छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा दिलाने प्रदेश के सभी सांसदों में एकजुटता की आवश्यकता- कवि संतोष सोनकर

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

राजिम, 30 नवंबर।  छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस के मौके पर क्षेत्र के कवि एवं साहित्यकार संतोष कुमार सोनकर मंडल ने चर्चा के दौरान कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के लिए प्रदेश के सभी सांसदों ने एकजुटता दिखाई थी। इसी तरह से छत्तीसगढ़ी को संविधान के आठवीं अनुसूची में दर्ज कराकर राजभाषा का दर्जा देने के लिए प्रयास करना चाहिए। ढेर सारे साहित्यिक रचनाएं छत्तीसगढ़ी में लिखी जा चुकी है। पहले छत्तीसगढ़ी बोलने वाले को हीन भावना से देखा जाता था परंतु  यह मिथक टूट चुका है अब हर कोई छत्तीसगढ़ी बोलते हुए देखे एवं सुनी जा सकती है। गांव, शहर, गली, मोहल्ले, चौंक, चौबारे मंचीय कार्यक्रम तथा यहां तक की छत्तीसगढ़ के विधानसभा भवन में भी विधायकों के द्वारा छत्तीसगढ़ी में प्रश्न करते हुए देखें जा रहे हैं।

बताना होगा कि राजिम के ही आदि कवि पंडित सुंदरलाल शर्मा ने सन 1904 में छत्तीसगढ़ी दानलीला नामक काव्य संग्रह तैयार किया था जो बहुत प्रसिद्ध हुआ। इसके बाद तो छत्तीसगढ़ी में लगातार साहित्यिक रचनाएं होने लगी। श्री सोनकर ने आगे बताया कि भाषा किसी भी प्रदेश के लिए अहम होती है। जैसे ओडिशा के लोग उडिय़ा, पंजाब के पंजाबी, हरियाणा के हरियाणवी, कर्नाटक में कन्नड़, महाराष्ट्र मराठी, गुजरात गुजराती, पश्चिम बंगाल बंगाली, केरल एवं लक्षद्वीप मलयालम, तमिलनाडु तमिल, बिहार भोजपुरी, आंध्रप्रदेश तेलुगू, गोवा कोंकणी इत्यादि भाषाएं बोली जाती है।

 

उन्होंने बताया कि भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू अपने कार्यकाल के दौरान छत्तीसगढ़ पहुंचे हुए थे, तब वह छत्तीसगढ़ी बोली से बहुत ज्यादा प्रभावित हुए थे और सदन में छत्तीसगढ़ी को मीठा शब्द कहा था। अब तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छत्तीसगढ़ आते हैं तो अपनी भाषण की शुरुआत जय जोहार से करते हैं। सचमुच में छत्तीसगढ़ी बहुत ही गुरतुर भाखा है।

इन्होंने बताया कि वह लेखन की शुरुआत छत्तीसगढ़ी में ही किया था, 90 के दशक में उनकी रचना कांदी के लुवईया तै कहां भुलागे... बहुत पढ़ी गई थी। अभी तक अनेक कविता कहानी छत्तीसगढ़ी में लिख चुके हैं।

 श्री सोनकर ने आगे बताया कि छत्तीसगढ़ी न सिर्फ छत्तीसगढ़ में बल्कि पड़ोसी राज्य उड़ीसा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र के सीमा से लगे हुए लोग भी बड़ी संख्या में बोलते हैं। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ी को छत्तीसगढ़ में राजभाषा का दर्जा 28 नवंबर 2007 को दिया गया था, जब छत्तीसगढ़ विधानसभा ने छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग विधेयक पारित किया था इसी दिन के स्मरण में प्रतिवर्ष 28 नवंबर को छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है।


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